मुंबई-वाढवण एक्सप्रेसवे परियोजना को मिली रफ्तार, पहले चरण के लिए 104 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण शुरू

Thecity news
3 Min Read

उत्तन गांव के भूमि मालिकों को 15 दिन का नोटिस, निजी समझौते या कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा अधिग्रहण

मुंबई-वाढवण एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी परियोजना को गति देते हुए मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने पहले चरण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू कर दी है। करीब 58,754 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत पहले चरण में 104 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए उत्तन गांव के भूमि मालिकों को 15 दिनों का नोटिस जारी कर निजी बातचीत के माध्यम से जमीन देने पर सहमति मांगी गई है।

एमएमआरडीए ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भूमि मालिकों की सहमति नहीं मिलती है, तो महाराष्ट्र क्षेत्रीय व नगर नियोजन अधिनियम, 1966 के प्रावधानों के तहत कानूनी प्रक्रिया अपनाकर भूमि अधिग्रहण किया जाएगा।

परियोजना को मिला सार्वजनिक महत्व का दर्जा

राज्य सरकार पहले ही परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और क्रियान्वयन रणनीति को मंजूरी दे चुकी है। पहले इस परियोजना को उत्तन-विरार सी लिंक परियोजना के नाम से जाना जाता था, लेकिन अब इसका नाम बदलकर मुंबई-वाढवण एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी परियोजना रखा जाएगा।

सरकार ने इस परियोजना को महत्वाकांक्षी शहरी परिवहन परियोजना और अत्यावश्यक सार्वजनिक परियोजना का दर्जा दिया है, जिससे इसके कार्यान्वयन में तेजी लाई जा सके।

किस कानून के तहत होगा भूमि अधिग्रहण?

एमएमआरडीए के उप महानगर आयुक्त अजिंक्य पडवल द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, भूमि अधिग्रहण महाराष्ट्र क्षेत्रीय व नगर नियोजन अधिनियम, 1966 की धारा 126(1)(A) और 126(1)(B) के तहत किया जाएगा।

भूमि मालिकों को मुआवजे के लिए कई विकल्प दिए गए हैं। वे निजी समझौते के तहत नकद मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं या फिर एफएसआई (FSI) और टीडीआर (TDR) के रूप में भी मुआवजा लेने का विकल्प चुन सकते हैं।

11,116 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त सहयोग

परियोजना के लिए राज्य सरकार 11,116.27 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराएगी। इसमें 2,619 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण तथा 261 करोड़ रुपये पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के लिए निर्धारित किए गए हैं। परियोजना की शेष लागत एमएमआरडीए अपने संसाधनों और ऋण के माध्यम से जुटाएगा।

15 दिनों में देनी होगी लिखित सहमति

एमएमआरडीए ने भूमि मालिकों, कब्जाधारकों और अन्य हितधारकों से 15 दिनों के भीतर बांद्रा (पूर्व) स्थित अतिरिक्त जिलाधिकारी कार्यालय में अपनी लिखित सहमति जमा करने को कहा है। तय समय में सहमति नहीं मिलने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत भूमि अधिग्रहण शुरू किया जाएगा।

परियोजना के लिए आवश्यक सरकारी भूमि एमएमआरडीए को नि:शुल्क हस्तांतरित की जाएगी। साथ ही प्राधिकरण को इस एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर पर टोल वसूलने, उपयोगकर्ता शुल्क लेने तथा विज्ञापन एवं अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के माध्यम से राजस्व अर्जित करने का अधिकार भी दिया गया है, जिससे परियोजना की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *