Online Gaming Addiction: बच्चों में बढ़ता ऑनलाइन गेमिंग का चलन, मोटापा और मानसिक स्वास्थ्य पर दिख रहे गंभीर असर

Thecity news
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नई दिल्ली: ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के तेजी से विकास ने बच्चों के बीच गेमिंग के प्रति आकर्षण तो बढ़ाया है, लेकिन इसके साथ लत और शोषण की चिंताएं भी गहराती जा रही हैं।
साइबरपीस की एक हालिया रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि बढ़ते जोखिमों से बच्चों को बचाने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप और निगरानी प्रणाली की सख्त ज़रूरत है।


⚠️ शुरुआती उम्र में ऑनलाइन गेमिंग का नकारात्मक प्रभाव

रिपोर्ट के अनुसार, कम उम्र में गेमिंग से संपर्क बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
लगातार गेम खेलने से बच्चे वास्तविक सामाजिक संपर्क से दूर होते जा रहे हैं और उनका ध्यान पढ़ाई से हटता जा रहा है।


🧍‍♂️ मोटापा: गेमिंग से बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याएं

शारीरिक विकास को लेकर रिपोर्ट में उल्लेख है कि लंबे समय तक गेमिंग करने से बच्चों में कई स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिल रही हैं।
एक अध्ययन में पाया गया कि जो बच्चे स्क्रीन के सामने अधिक समय बिताते हैं, उनका बॉडी मास इंडेक्स (BMI) अधिक होता है और उनके मोटापे का खतरा बढ़ जाता है।
अत्यधिक गेमिंग बच्चों को बैठे रहने की आदत देती है, जिससे मोटापा, हृदय रोग और मधुमेह जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ता है।


💻 बार-बार होने वाली चोटें और नींद की कमी

रिपोर्ट में बताया गया है कि लगातार माउस क्लिक करने या कंट्रोलर पकड़ने से बच्चों में कार्पल टनल सिंड्रोम जैसी चोटें हो सकती हैं।
साथ ही, ऑनलाइन गेमिंग की लत नींद की दिनचर्या को भी बिगाड़ रही है। बच्चों में देर रात तक जागने और नींद की कमी की प्रवृत्ति बढ़ी है, जो उनके मानसिक संतुलन और एकाग्रता पर असर डालती है।


🧠 मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर असर

रिपोर्ट के मुताबिक, गेमिंग की लत बच्चों में चिड़चिड़ापन, तनाव और आक्रामकता बढ़ा रही है।
लंबे समय तक गेम खेलने वाले बच्चे सामाजिक रूप से अलग-थलग हो जाते हैं और उनमें डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षण बढ़ते हैं।


🛡️ सुरक्षा और नीति संबंधी सुझाव

साइबरपीस की रिपोर्ट में बच्चों की सुरक्षा के लिए कई उपाय सुझाए गए हैं। इसमें आयु सत्यापन प्रणाली (Age Verification) की स्पष्ट कार्यप्रणाली लागू करने पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (DPDP Act) में ऐसी जांचों को अनिवार्य किया गया है, लेकिन कार्यान्वयन को लेकर अस्पष्टता है।


📜 कंटेंट विनियमन की मांग

संगठन ने सुझाव दिया है कि हिंसा, कामुकता और वयस्क विषयों से संबंधित गेम्स पर सख्त नियंत्रण होना चाहिए।
भारत में वर्तमान में PEGI (Pan European Game Information) जैसी कोई कंटेंट रेटिंग प्रणाली नहीं है, जिससे गेमिंग कंटेंट का मानक निर्धारण मुश्किल हो जाता है।


🧩 निष्कर्ष: संतुलन और निगरानी ज़रूरी

ऑनलाइन गेमिंग बच्चों के लिए मनोरंजन का साधन तो है, लेकिन संयम और निगरानी के बिना यह स्वास्थ्य और मानसिक विकास के लिए खतरा बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता, स्कूल और नीति निर्माताओं को मिलकर बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखनी चाहिए।

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