भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 0.25% की कटौती कर इसे 5.25% कर दिया। इससे लोन सस्ते होंगे और मौजूदा EMI पर राहत मिलेगी। जानें RBI गवर्नर के बयान और GDP अनुमान अपडेट।
RBI ने रेपो रेट में 0.25% की कटौती की
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट को 5.50% से घटाकर 5.25% कर दिया है।
- फैसले का ऐलान मॉनेटरी पॉलिसी समिति (MPC) की 3 से 5 दिसंबर तक चली बैठक में हुआ।
- RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसे तुरंत प्रभाव से लागू बताया।
इस कटौती का असर लोन और EMI पर होगा, जिससे आने वाले दिनों में कर्ज सस्ते होंगे और मौजूदा लोन की किश्तें भी कम होंगी।
RBI गवर्नर के बयान की प्रमुख बातें
- समिति ने एकमत से रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट घटाया।
- बदलते भूराजनीतिक और व्यापार माहौल का अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा।
- मौजूदा आर्थिक हालत को ‘रेयर गोल्डीलॉक्स पीरियड’ बताया।
GDP वृद्धि दर और अन्य फैसले
- GDP वृद्धि दर: 6.3% से बढ़ाकर 7.3%
- RBI ने 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद की योजना बनाई।
- 3 वर्षीय डॉलर-रुपया स्वैप का भी निर्णय लिया गया।
- महंगाई अनुमान घटाकर 2.0% किया गया।
- वित्त वर्ष 2026 के लिए अगली पहली तिमाही GDP अनुमान 6.7%, दूसरी तिमाही 6.8%।
RBI गवर्नर की प्रेस कॉन्फ्रेंस की अन्य अहम बातें
- वाणिज्यिक क्षेत्र में संसाधन प्रवाह बढ़कर 20.1 लाख करोड़ रुपये।
- विदेशी मुद्रा भंडार 686 अरब डॉलर।
- GST सुधार और त्यौहार खर्च ने घरेलू मांग को बढ़ावा दिया।
रेपो रेट में कटौती का फायदा
- बैंकों को सस्ता कर्ज मिलेगा और ग्राहकों को लोन 0.25% तक सस्ते मिलेंगे।
- उदाहरण: 30 लाख रुपये का 20 साल का लोन
- पहले 8% ब्याज: कुल चुकाना = 60.22 लाख रुपये
- अब 7.75% ब्याज: कुल चुकाना = 59.10 लाख रुपये
रेपो रेट क्या होती है?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देती है।
- बैंकों को RBI से लोन पर जो ब्याज देना होता है, वही रेपो रेट कहलाता है।
- यह अर्थव्यवस्था के सबसे अहम फैक्टर्स में से एक है और लोन, ब्याज दरों पर सीधा असर डालती है।

