Sunil Chhetri Retirement: सुनील छेत्री ने कहा अलविदा, भारत के दिग्गज फुटबॉलर ने लिया अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास

Thecity news
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भारतीय फुटबॉल टीम के दिग्गज खिलाड़ी सुनील छेत्री ने आखिरकार अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की पुष्टि कर दी है।
एएफसी एशियन कप 2027 के क्वालिफायर्स में भारत के असफल रहने के बाद छेत्री ने यह निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि अब भारत के लिए फुटबॉल खेलते हुए उनका सफर खत्म हो गया है।


🎯 एएफसी एशियन कप के बाद लिया बड़ा फैसला

छेत्री ने 2024 में संन्यास की घोषणा की थी, लेकिन पूर्व कोच मैनोलो मार्क्वेज के अनुरोध पर उन्होंने फिर से वापसी की थी।
हालांकि, भारत के क्वालीफाई न कर पाने के बाद उन्होंने कहा कि अब वह स्थायी रूप से अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास ले रहे हैं।

“अब मेरे लिए यह सही समय है कि मैं युवाओं के लिए जगह छोड़ दूं,” छेत्री ने कहा।


🏆 पेशेवर फुटबॉल से भी ले सकते हैं विदाई

42 वर्षीय छेत्री ने संकेत दिए हैं कि आने वाले साल में वह पेशेवर फुटबॉल (क्लब लेवल) से भी संन्यास ले सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि बेंगलुरु FC आने वाले इंडियन सुपर लीग (ISL 2025-26) में कैसा प्रदर्शन करता है।


🗣️ छेत्री ने कही दिल छू लेने वाली बात

छेत्री ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा,

“अगर हम ISL जीतते हैं, तो शायद मैं क्लब के रंगों में खेलते हुए अपना करियर खत्म करना चाहूंगा। 42 साल की उम्र में 15 गोल कर संन्यास लेना मेरे लिए सबसे अच्छा अंत होगा।”


👨‍🏫 भारतीय कोच से साझा किया अपना फैसला

भारतीय टीम के नए कोच खालिद जमील को छेत्री ने पहले ही अपने संन्यास की जानकारी दे दी थी।
छेत्री ने बताया —

“खालिद सर को बताना आसान था। मेरा उद्देश्य सिर्फ टीम की मदद करना था। अगर क्वालिफायर्स नहीं होते तो शायद मैं वापसी नहीं करता। उन्होंने मेरे फैसले को समझा और सम्मान दिया।”


🥇 सुनील छेत्री का सुनहरा करियर

  • डेब्यू: 2005 में भारत के लिए पहला मैच
  • अंतरराष्ट्रीय मैच: 156
  • गोल: 95
  • रिकॉर्ड:
    • सक्रिय खिलाड़ियों में तीसरे स्थान पर (क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनल मेसी के बाद)
    • भारत के सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी
    • एशिया के शीर्ष फॉरवर्ड्स में शामिल

🇮🇳 भारतीय फुटबॉल के इतिहास में अमर नाम

दो दशक तक भारतीय फुटबॉल को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाले सुनील छेत्री ने देश को कई यादगार जीतें दिलाईं।
उनकी फिटनेस, अनुशासन और नेतृत्व ने आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का काम किया।

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