
टाटा समूह के स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म टाटा न्यू जल्द ही बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक टाटा डिजिटल अपनी तीसरी बड़ी रणनीतिक री-स्ट्रक्चरिंग से गुजर रहा है।
नए CEO सजित शिवनंदन कंपनी को GMV-आधारित मॉडल से हटाकर ग्रुप-लेवल इंटीग्रेशन की दिशा में ले जा रहे हैं। इसी बदलाव के तहत टाटा न्यू में कर्मचारियों की संख्या 50% से अधिक कम होने की संभावना जताई गई है।
🔹 छंटनी की मुख्य वजह: परिचालन को सरल बनाना
रिपोर्ट के अनुसार, छंटनी का सबसे बड़ा कारण है—
- संचालन प्रक्रिया को सरल बनाना
- ग्रुप-लेवल डिजिटल इंटीग्रेशन को मजबूत करना
- लागत में कटौती
- दोहराव वाली भूमिकाओं को हटाना
टाटा डिजिटल अब टाइटन, IHCL, टाटा मोटर्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी कंपनियों की डिजिटल मार्केटिंग को सेंट्रलाइज कर रहा है।
इसके अलावा बिगबास्केट और क्रोमा में भी समीक्षा के तहत कई रणनीतिक बदलाव चल रहे हैं।
🔹 बिगबास्केट और क्रोमा पर संभावित असर
बिगबास्केट की प्राथमिकता अब उसकी एक्सप्रेस डिलीवरी सर्विस BB Now है, जिसका मुकाबला ब्लिंकिट, जेप्टो और इंस्टामार्ट जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से है।
उद्योग में तेज़ डिलीवरी और उच्च मार्जिन प्रोडक्ट कैटेगरी पर जोर बढ़ रहा है।
दूसरी ओर क्रोमा घाटे वाले स्टोर बंद करने, ऑपरेटिंग मॉडल सुधारने और ऑनलाइन-ऑफलाइन इंटीग्रेशन को मजबूत करने पर काम कर रहा है, ताकि प्रतिस्पर्धी माहौल में खुद को स्थिर किया जा सके।
🔹 भविष्य की प्राथमिकताएं: फाइनेंशियल सर्विसेज और यूनिफाइड लॉयल्टी इंजन
विशेषज्ञों के अनुसार, आगे टाटा डिजिटल इन 3 मुख्य क्षेत्रों पर फोकस करेगा:
- फाइनेंशियल सर्विसेज
- मार्केटिंग सर्विसेज
- यूनिफाइड लॉयल्टी इंजन
योजना है कि पूरे समूह के लॉयल्टी प्रोग्राम्स को एक ही रिवार्ड करेंसी में बदला जाए और सभी डिजिटल मार्केटिंग प्रयासों को केंद्रीकृत कर बेहतर मोनेटाइजेशन किया जाए।
वित्त वर्ष 2025 में टाटा डिजिटल का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 13.8% गिरकर 32,188 करोड़ रुपये रहा, जबकि कंपनी का नेट लॉस कम होकर 828 करोड़ रुपये पर आ गया।

