The Odyssey: भारत में नहीं मिलेगा क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म का असली IMAX अनुभव, जानिए क्यों

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70MM IMAX प्रोजेक्शन की सुविधा नहीं होने से भारतीय दर्शक चूकेंगे नोलन की कल्पना वाला सिनेमाई अनुभव

नई दिल्ली: हॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘द ओडिसी’ (The Odyssey) को लेकर दुनियाभर के सिनेमा प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है। अपनी फिल्मों को बड़े पर्दे पर शानदार विजुअल अनुभव देने के लिए मशहूर नोलन ने इस बार भी फिल्म को 70MM IMAX कैमरों से शूट किया है। हालांकि भारतीय दर्शकों के लिए एक निराशाजनक खबर सामने आई है। भारी-भरकम टिकट खरीदने के बाद भी उन्हें फिल्म का वह असली IMAX अनुभव नहीं मिल पाएगा, जिसकी कल्पना खुद नोलन ने की है।

भारत में क्यों नहीं मिलेगा असली IMAX अनुभव?

दरअसल, भारत में मौजूद अधिकांश IMAX थिएटर डिजिटल या लेजर प्रोजेक्शन सिस्टम पर आधारित हैं। जबकि The Odyssey को असली 70MM IMAX फिल्म फॉर्मेट में शूट किया गया है, जिसे पूरी भव्यता के साथ दिखाने के लिए विशेष 70MM फिल्म प्रोजेक्टर और विशाल स्क्रीन की आवश्यकता होती है।

फिलहाल भारत के किसी भी कमर्शियल थिएटर में ऐसा 70MM IMAX प्रोजेक्शन सिस्टम उपलब्ध नहीं है। ऐसे में दर्शक फिल्म तो देख सकेंगे, लेकिन नोलन द्वारा तैयार किए गए मूल फ्रेम, स्क्रीन अनुपात और विजुअल विस्तार का पूरा अनुभव नहीं ले पाएंगे।

महंगी टिकट के बाद भी अधूरा रहेगा अनुभव

मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और अन्य महानगरों में IMAX स्क्रीन पर फिल्म देखने के लिए दर्शक अक्सर 3,000 से 4,000 रुपये तक खर्च करते हैं। ‘द ओडिसी’ के लिए भी बड़ी संख्या में दर्शक महंगे टिकट खरीदने को तैयार हैं।

लेकिन तकनीकी सीमाओं के कारण मल्टीप्लेक्स संचालक चाहकर भी फिल्म को उसके मूल 70MM IMAX फॉर्मेट में प्रदर्शित नहीं कर पाएंगे। डिजिटल IMAX सामान्य स्क्रीन की तुलना में बेहतर जरूर है, लेकिन इसे फिल्म प्रेमी अक्सर ‘LieMAX’ यानी नकली IMAX भी कहते हैं क्योंकि यह असली 70MM IMAX अनुभव की बराबरी नहीं कर पाता।

भारत में कितने IMAX थिएटर हैं?

भारत में वर्तमान में लगभग 30 IMAX स्क्रीन संचालित हैं। इनमें से अधिकांश मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में स्थित हैं।

हालांकि इनमें लगभग सभी स्क्रीन डिजिटल IMAX तकनीक पर आधारित हैं। पहले गुजरात के साइंस सिटी में 70MM IMAX प्रोजेक्टर मौजूद था, लेकिन अब वहां भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि भारतीय दर्शक नोलन की फिल्म को उसके मूल तकनीकी स्वरूप में नहीं देख पाएंगे।

70MM फिल्म फॉर्मेट को क्यों पसंद करते हैं नोलन?

क्रिस्टोफर नोलन हमेशा से डिजिटल तकनीक की बजाय 70MM फिल्म रील को प्राथमिकता देते रहे हैं। उनका मानना है कि फिल्म रील पर शूट की गई तस्वीरों में अधिक गहराई, प्राकृतिक रंग और विशाल दृश्य प्रभाव देखने को मिलता है, जिसे डिजिटल माध्यम पूरी तरह दोहरा नहीं सकता।

‘द ओडिसी’ के जरिए नोलन ने एक बार फिर पारंपरिक फिल्म तकनीक को जीवित रखने की कोशिश की है। दुनिया के केवल कुछ चुनिंदा देशों में ही ऐसे थिएटर मौजूद हैं, जहां 70MM IMAX फिल्म का वास्तविक अनुभव लिया जा सकता है।

भारतीय दर्शक फिल्म की कहानी, अभिनय और निर्देशन का पूरा आनंद जरूर उठा सकेंगे, लेकिन तकनीकी रूप से नोलन की कल्पना के अनुरूप सिनेमाई अनुभव से वंचित रह जाएंगे।

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