उत्तर प्रदेश के उन्नाव में नाबालिग से बलात्कार के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। कोर्ट ने उनकी सजा को निलंबित भी कर दिया है। इस फैसले के विरोध में दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर सैकड़ों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस बीच यह भी सामने आया है कि सेंगर को इससे पहले भी पीड़िता और CBI के विरोध के बावजूद कई बार अंतरिम जमानत मिल चुकी है।
⚖️ 3 साल में 4 बार अंतरिम जमानत पर बाहर आया सेंगर
कुलदीप सिंह सेंगर बीते 3 वर्षों में 4 बार अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर आया है।
सेंगर ने दिल्ली हाई कोर्ट में दलील दी कि—
- अंतरिम जमानत के दौरान
उन्होंने कभी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया - वे पीड़िता या उसके परिवार के लिए कोई खतरा नहीं हैं
उन्होंने बेटी की शादी, मोतियाबिंद ऑपरेशन और चिंता, मधुमेह जैसी बीमारियों को जमानत का आधार बताया।
🚨 CBI के विरोध के बावजूद मिली राहत
न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, सेंगर अब तक कुल 23 दिनों तक अंतरिम जमानत पर बाहर रह चुका है।
जमानत की अवधि इस प्रकार रही—
- 27 जनवरी 2023 से 1 फरवरी 2023
- 6 फरवरी 2023 से 10 फरवरी 2023
- 11 दिसंबर 2024 से 20 दिसंबर 2024
- 23 दिसंबर 2024 से 24 दिसंबर 2024
पहली बार बेटी की शादी के लिए मिली जमानत का CBI और पीड़िता दोनों ने विरोध किया था।
🔄 कोर्ट ने आदेश में किया था संशोधन
पीड़िता ने कोर्ट को बताया था कि सेंगर के बाहर रहने से उसकी जान को खतरा हो सकता है।
इसके बाद हाई कोर्ट ने आदेश में संशोधन करते हुए—
- सेंगर को 1 फरवरी को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया
- फिर 6 फरवरी को दोबारा जमानत दी गई
- 10 फरवरी को सेंगर ने आत्मसमर्पण किया
इस दौरान बेटी की शादी 8 फरवरी को हुई थी।
🏥 2024 में 5 महीने की जमानत मांगी
2024 में सेंगर ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए 5 महीने की अंतरिम जमानत की मांग की थी।
उन्होंने कोर्ट में 8 बीमारियों का जिक्र किया, जिनमें—
- मधुमेह
- उच्च रक्तचाप
- अस्थमा
- रीढ़ की हड्डी की बीमारी
- मोतियाबिंद
शामिल थीं।
हालांकि कोर्ट ने 5 महीने की जगह 11 से 20 दिसंबर 2024 तक की जमानत दी।
🏥 AIIMS में बढ़ी मुलाकातों पर जताई गई चिंता
इलाज के दौरान सेंगर से मिलने असामान्य संख्या में लोग AIIMS पहुंचे, जिस पर अस्पताल प्रबंधन ने चिंता जताई।
AIIMS के चिकित्सा बोर्ड ने इस संबंध में CBI निदेशक को पत्र लिखकर कहा कि—
- इससे इलाज और
- अस्पताल का नियमित कामकाज
प्रभावित हो रहा है।
इसके बाद 23–24 दिसंबर 2024 को मोतियाबिंद सर्जरी के लिए फिर अंतरिम जमानत दी गई।
⚖️ हाई कोर्ट ने किस आधार पर दी जमानत?
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि—
- सेंगर पर POCSO एक्ट की धारा 5(C) लागू नहीं होती
- IPC की धारा 376(2)(B) के तहत उन्हें लोक सेवक की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता
- किसी व्यक्ति को सिर्फ इस आशंका पर हिरासत में नहीं रखा जा सकता कि
पुलिस या सुरक्षा एजेंसियां अपना काम ठीक से नहीं करेंगी

