यूपी के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में अर्द्ध वार्षिक परीक्षाओं को लेकर बड़ा भ्रम पैदा हो गया है। परीक्षा 30 अंकों की होनी चाहिए, लेकिन इस बार बीएसए कार्यालय द्वारा 50 अंकों के प्रश्नपत्र भेजे गए, जिनसे छात्र परीक्षा दे रहे हैं। शिक्षक मूल्यांकन को लेकर परेशान हैं कि कॉपियों की जाँच 30 अंकों के आधार पर करें या 50 के आधार पर?
🔵 शिक्षकों में भ्रम — किस पूर्णांक पर दें नंबर?
लखनऊ के 1618 प्राइमरी स्कूलों में करीब 1.5 लाख छात्र पंजीकृत हैं।
- दो टर्म परीक्षाओं (10–10 अंक) के बाद
- 10 दिसंबर से अर्द्ध वार्षिक परीक्षा शुरू हुई है
इस बार सभी कक्षाओं में प्रश्नपत्र 50 अंक के दिए गए।
शिक्षकों का कहना है—
अगर 50 अंक का पूर्णांक माना जाए तो कुल अंक 120 हो जाएंगे, जिससे रिपोर्ट कार्ड बनाने में समस्या आएगी, क्योंकि विभागीय पोर्टल पर प्रोफार्मा 30 अंकों की अर्द्धवार्षिक परीक्षा के अनुसार सेट है।
🔵 विभागीय पैटर्न क्या कहता है? (Official Marking Framework)
✔ कक्षा-वार परीक्षा संरचना
- कक्षा 1: 30 अंक की मौखिक परीक्षा
- कक्षा 2–3: 15 मौखिक + 15 लिखित = 30 अंक
- कक्षा 4–5: 9 मौखिक + 21 लिखित = 30 अंक
- कक्षा 6–8: 30 अंक की लिखित परीक्षा
लेकिन मौजूदा प्रश्नपत्र 50 अंक के हैं और सभी प्रकार के प्रश्न शामिल हैं—MCQ, रिक्त स्थान, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय आदि।
🔵 विभागीय नियम — पूरे सत्र की मार्किंग कैसे होती है?
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार:
- पूरे सत्र में हर विषय का पूर्णांक 100
- 10 अंक – पहली टर्म परीक्षा
- 10 अंक – दूसरी टर्म परीक्षा
- 30 अंक – अर्द्ध वार्षिक परीक्षा
- 50 अंक – वार्षिक परीक्षा
इसी प्रोफार्मा के अनुसार ही रिपोर्ट कार्ड और पोर्टल एंट्री होती है।
🔵 असली समस्या क्या?
- अर्द्धवार्षिक के लिए 30 अंक तय हैं
- प्रश्नपत्र 50 अंक का बनाया गया
- इससे मूल्यांकन में गड़बड़ी, भ्रम और रिपोर्ट कार्ड में त्रुटि की संभावना
🔵 बीएसए का जवाब
बीएसए विपिन कुमार ने बताया:
“मामले की जानकारी नहीं है, जाँच कराते हैं। बच्चों और शिक्षकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। मूल्यांकन निदेशालय के निर्देशों के अनुसार होगा।”
उन्होंने गुरुवार को कई स्कूलों का निरीक्षण कर परीक्षा व्यवस्था भी देखी।

