138 करोड़ रुपये की कस्टम ड्यूटी चोरी का खुलासा: चीन-अमेरिका के अखरोट को अफगानिस्तान का बताकर भारत में किया जा रहा था आयात, 5 गिरफ्तार

Thecity news
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नवी मुंबई स्थित न्हावा शेवा बंदरगाह पर सीमा शुल्क अधिकारियों ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आयात घोटाले का पर्दाफाश किया है। जवाहरलाल नेहरू कस्टम हाउस (JNCH) की केंद्रीय खुफिया इकाई (CIU) द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन को-फाइंड’ के तहत ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जो चीन, अमेरिका और चिली से आने वाले अखरोट को अफगानिस्तान का बताकर भारत में आयात कर रहा था। इस धोखाधड़ी से सरकार को लगभग 138.84 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

‘ऑपरेशन को-फाइंड’ में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा

विशेष खुफिया सूचना के आधार पर जेएनसीएच की केंद्रीय खुफिया इकाई ने जांच शुरू की, जिसमें पता चला कि विदेशी अखरोट की खेपों को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के जेबेल अली बंदरगाह के जरिए भारत भेजा जा रहा था। आयातकों ने दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) के तहत मिलने वाले तरजीही शुल्क लाभ का गलत इस्तेमाल करने के लिए इन खेपों को अफगानिस्तान का उत्पाद घोषित किया।

जांच में खुलासा हुआ कि वास्तविक रूप से चीन, अमेरिका और चिली से आने वाले अखरोट को फर्जी दस्तावेजों के जरिए अफगानिस्तान का बताकर सीमा शुल्क में भारी छूट हासिल की जा रही थी।

110 प्रतिशत टैक्स को घटाकर किया गया 5 प्रतिशत

अधिकारियों के अनुसार, इस फर्जीवाड़े के जरिए अखरोट पर लगने वाले प्रभावी सीमा शुल्क को लगभग 110 प्रतिशत से घटाकर केवल 5 प्रतिशत कर दिया गया था।

इसके लिए तस्करों ने माल की आवाजाही दर्शाने वाले फर्जी बिल ऑफ लीडिंग और पारगमन दस्तावेज तैयार किए। दस्तावेजों में माल को ईरान के बंदर अब्बास से यूएई के जेबेल अली होते हुए अफगानिस्तान से आया हुआ दिखाया गया, जबकि वास्तविकता इससे अलग थी।

मुंबई में छापेमारी, डिजिटल और दस्तावेजी सबूत बरामद

जांच के दौरान मुंबई और आसपास के कई स्थानों पर समन्वित छापेमारी की गई। कार्रवाई में बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजी सबूत बरामद हुए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें सूरत के कारोबारी दीपकभाई काकड़िया के पुत्र स्नेह दीपकभाई काकड़िया को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक है और फर्जी आयातकों के जरिए माल की खरीद, वित्तपोषण, सीमा शुल्क निकासी और बाजार में बिक्री का संचालन करता था।

अदालत ने उसे 12 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

आयात के आंकड़ों से खुली पोल

सीमा शुल्क विभाग को शक तब हुआ जब जेएनसीएच में अखरोट के देशवार आयात आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान पाया गया कि एक निश्चित अवधि में अफगानिस्तान से आयातित अखरोट की मात्रा में असामान्य वृद्धि हुई और उसके बाद अचानक गिरावट दर्ज की गई।

अधिकारियों के अनुसार, यह पैटर्न सामान्य व्यापारिक गतिविधियों से मेल नहीं खाता था, जिससे मूल देश के संबंध में फर्जी दावों की आशंका मजबूत हुई।

घरेलू उत्पादकों और ईमानदार कारोबारियों को हुआ नुकसान

इस धोखाधड़ी के कारण कम शुल्क पर आयातित अखरोट भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर बेचे गए, जिससे प्रतिस्पर्धा का संतुलन बिगड़ गया।

इसका सीधा असर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश के अखरोट उत्पादकों पर पड़ा। साथ ही, नियमों का पालन करने वाले ईमानदार आयातकों और कारोबारियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी नहीं दी राहत

मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में मुंबई हाईकोर्ट ने जब्त की गई खेपों को बिना शर्त छोड़ने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

अदालत ने सीमा शुल्क विभाग के राजस्व संरक्षण के अधिकार को बरकरार रखते हुए कहा कि जब्त माल की रिहाई केवल 2.78 करोड़ रुपये की अंतर शुल्क राशि जमा करने या समान मूल्य की बैंक गारंटी देने की शर्त पर ही संभव होगी।

जांच का दायरा बढ़ा, अन्य लाभार्थियों की तलाश जारी

सीआईयू अधिकारियों ने बताया कि जांच अभी जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लाभार्थियों, वित्तीय सहयोगियों, फर्जी आयातकों और संदिग्ध खेपों की पहचान की जा रही है। एजेंसियां इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही हैं ताकि राजस्व चोरी के पूरे तंत्र का खुलासा किया जा सके।

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