जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद 500 से ज्यादा फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट चिन्हित, महाराष्ट्र साइबर सेल ने उजागर किया पाकिस्तान कनेक्शन

Thecity news
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महाराष्ट्र साइबर सेल ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें व भ्रामक सामग्री फैलाने वाले 500 से अधिक संदिग्ध प्रोफाइल की पहचान की है। जांच में पाकिस्तान से संचालित नेटवर्क और एआई के जरिए तैयार की गई भ्रामक सामग्री का भी खुलासा हुआ है।

महाराष्ट्र पुलिस की साइबर सेल ने जंतर-मंतर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें, गलत जानकारी और राष्ट्रविरोधी सामग्री प्रसारित करने वाले 500 से अधिक संदिग्ध सोशल मीडिया प्रोफाइल की पहचान की है। विभाग का दावा है कि जांच के दौरान इन गतिविधियों के पीछे पाकिस्तान कनेक्शन भी सामने आया है।

चार दिन की जांच में सामने आए सैकड़ों संदिग्ध अकाउंट

महाराष्ट्र साइबर सेल ने चार दिनों तक सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी की। जांच में 500 से अधिक ऐसे संदिग्ध खाते चिन्हित किए गए, जिनका इस्तेमाल देशभर में अफवाहें फैलाने और सार्वजनिक शांति भंग करने के उद्देश्य से किया गया था। विभाग के अनुसार, 429 पोस्ट भारत के भीतर से किए गए, जिनमें अधिकांश का संबंध महाराष्ट्र से था।

एआई से तैयार की गई भ्रामक सामग्री

जांच में यह भी सामने आया कि कई भ्रामक पोस्ट कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) टूल्स की मदद से तैयार किए गए थे। साइबर सेल का कहना है कि इनका उद्देश्य सांप्रदायिक तनाव बढ़ाना और लोगों को गुमराह करना था। जांच के दौरान पाकिस्तान स्थित 86 एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट (एपीटी) समूहों की पहचान भी की गई, जिन पर वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों से जुड़ी फर्जी और आपत्तिजनक सामग्री फैलाने का आरोप है।

‘प्रधानमंत्री ने इस्तीफा दिया’ जैसे फर्जी दावे

साइबर सेल के अनुसार, सोशल मीडिया पर कई झूठे दावे भी वायरल किए गए। एक इंस्टाग्राम पोस्ट, जिसे पाकिस्तान से संचालित अकाउंट से साझा किया गया बताया गया है, उसमें जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों की मौत होने का फर्जी दावा किया गया। वहीं, एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे का झूठा दावा प्रसारित किया गया।

कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू

महाराष्ट्र साइबर विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक यशस्वी यादव ने बताया कि राष्ट्रविरोधी और भ्रामक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और समन जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जांच प्रदर्शन वाले दिन और उसके बाद के दो दिनों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर केंद्रित रही, जिसमें कुल चार दिनों के डेटा का विश्लेषण किया गया।

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