अमेरिकी सिंगर ने दिपके पर विदेशी डोनर्स से संबंध होने का दावा किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत कर सकारात्मक भूमिका निभाने की सलाह दी।
अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके के बीच सोशल मीडिया पर जुबानी जंग छिड़ गई है। मिलबेन ने दिपके पर अमेरिकी डोनर्स से संबंध होने का दावा करते हुए कानून का पालन नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने दिपके को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करने और भारत के लिए सकारात्मक भूमिका निभाने की सलाह भी दी।
मिलबेन ने कानून का पालन करने की दी सलाह
मैरी मिलबेन ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दिपके को टैग करते हुए लिखा कि सच्चाई सभी को आजाद करती है। उन्होंने दावा किया कि जब अमेरिकी डोनर्स को लगेगा कि दिपके सफल नहीं हो रहे हैं, तो वे उनका साथ छोड़ देंगे। मिलबेन ने कहा कि कानून का उल्लंघन करके सफलता हासिल नहीं की जा सकती।
उन्होंने दिपके से अपनी अमेरिकी शिक्षा और प्रतिभा का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए करने की अपील की। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठकर भारत को आगे बढ़ाने में सकारात्मक भूमिका निभाने की सलाह दी।
मिलबेन ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिकी समर्थन की जरूरत नहीं है, क्योंकि उन्हें भारत के करीब 1.5 अरब नागरिकों का समर्थन हासिल है। उन्होंने मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में लगभग 12 साल के कार्यकाल और लगातार तीन बार पद संभालने का जिक्र करते हुए 2029 में भी उनकी जीत का दावा किया।
दिपके ने विदेशी दखल पर उठाए थे सवाल
मिलबेन की यह प्रतिक्रिया अभिजीत दिपके की उस पोस्ट के बाद आई, जिसमें उन्होंने भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी नागरिकों के कथित हस्तक्षेप पर सवाल उठाए थे। दिपके ने पूछा था कि प्रधानमंत्री मोदी अपने ही देश के नागरिकों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों मांग रहे हैं। उन्होंने कहा था कि भारत अपने आंतरिक मुद्दों को सुलझाने में सक्षम है और उसे बाहरी लोगों के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
दिपके की पोस्ट में मिलबेन के उस इंटरव्यू का भी जिक्र था, जिसमें उन्होंने भारतीय युवाओं से सीजेपी के खिलाफ खड़े होने की अपील की थी और पार्टी को अमेरिकी डोनर्स से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया था।
SIR विवाद के बीच अमेरिका से आई एक और प्रतिक्रिया
यह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया है। सीजेपी और विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।
इसी बीच, अमेरिका के वॉशिंगटन के 7वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट की प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल ने भी भारत में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने बुधवार को एक्स पर दावा किया कि भारत में 13 करोड़ लोगों को मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इसकी तुलना अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के कदमों से करते हुए कहा कि इससे लोकतंत्र में मतदान के अधिकार कमजोर होने की चिंता पैदा होती है।
अमेरिका के SAVE America Act में क्या है?
अमेरिका में प्रस्तावित SAVE America Act का उद्देश्य संघीय चुनावों में मतदान से जुड़े नियमों में बदलाव करना है। 29 जनवरी को कांग्रेस में पेश किए गए इस विधेयक में मतदाता पंजीकरण के दौरान अमेरिकी नागरिकता का भौतिक प्रमाण और मतदान के समय वैध फोटो पहचान पत्र अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।
विधेयक में डाक से मतदान को कुछ विशेष परिस्थितियों तक सीमित करने और संघीय डेटाबेस की मदद से मतदाता सूची से गैर-नागरिकों के नाम हटाने का भी प्रावधान है।

