पश्चिम बंगाल में संगठन विस्तार की रणनीति के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना पूरा ध्यान पंजाब विधानसभा चुनाव पर केंद्रित कर दिया है। पार्टी राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को चुनौती देने के लिए नई चुनावी रणनीति तैयार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की चुनावी तैयारियों की कमान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को सौंपी गई है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पंजाब की बदलती राजनीतिक परिस्थितियां भाजपा के लिए नए अवसर पैदा कर सकती हैं।
पंजाब में भाजपा नेताओं की अहम बैठक जल्द
सूत्रों के मुताबिक अमित शाह जल्द ही पंजाब भाजपा नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुला सकते हैं। इस बैठक में संगठन विस्तार, चुनावी रणनीति और राज्य में चलाए जाने वाले जनसंपर्क अभियानों पर चर्चा होने की संभावना है। खासतौर पर नशे के खिलाफ अभियान को भाजपा अपने प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल कर सकती है।
पंजाब में ड्रग्स का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रहा है। ऐसे में भाजपा इस मुद्दे को जनजागरण अभियान के माध्यम से जनता तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है।
सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी भाजपा
भाजपा ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में अकेले मैदान में उतरने का फैसला किया है। पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी और इस बार Shiromani Akali Dal के साथ गठबंधन नहीं करेगी।
पार्टी का फोकस बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और घर-घर संपर्क अभियान चलाकर मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने से पार्टी को अपने जनाधार का विस्तार करने का अवसर मिलेगा।
रवनीत सिंह बिट्टू की भूमिका पर नजर
पंजाब भाजपा की चुनावी रणनीति में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री Ravneet Singh Bittu की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त होने वाला है और अभी तक भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बिट्टू विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। ऐसी भी अटकलें हैं कि वे पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं, जिससे पार्टी को राज्य में एक मजबूत चेहरा मिल सकता है।
बूथ स्तर पर मजबूत संगठन बनाने की कवायद
भाजपा ने पंजाब में संगठन विस्तार के लिए बूथ स्तर पर विशेष अभियान शुरू किया है। पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क साध रहे हैं और केंद्र सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस बार पंजाब में अपनी उपस्थिति को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है।
आप में बगावत से भाजपा को मिल सकता है फायदा
पार्टी को उम्मीद है कि आम आदमी पार्टी के भीतर उभरे असंतोष का लाभ उसे आगामी चुनाव में मिल सकता है। हाल के महीनों में AAP से जुड़े कई नेताओं और सांसदों के पार्टी छोड़ने की चर्चाएं राजनीतिक हलकों में तेज रही हैं।
भाजपा का मानना है कि विपक्षी दलों में असंतोष और नेतृत्व संबंधी चुनौतियां चुनावी मुकाबले में उसके पक्ष में माहौल बना सकती हैं।
पिछले चुनाव के आंकड़ों से सीख
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 117 सीटों में से 38 विधानसभा क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। हालांकि पार्टी बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे रह गई थी। इसी कारण इस बार केंद्रीय नेतृत्व ने पंजाब पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा की रणनीति संगठन विस्तार, स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाने और प्रमुख मुद्दों पर जनसमर्थन जुटाने पर केंद्रित रहेगी।
पंजाब चुनाव पर टिकी राष्ट्रीय राजनीति की नजर
पंजाब विधानसभा चुनाव को भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है। एक ओर AAP सत्ता बचाने की चुनौती का सामना कर रही है, वहीं भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। आने वाले महीनों में पंजाब की राजनीति में कई नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।

