11 छात्राओं से जुड़े आरोपों को लेकर बीजेपी महिला मोर्चा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिकायत की। कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने आरोपों को खारिज कर जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में 11 छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न का मामला राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की महिला नेताओं ने कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वहीं, अकोइजम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है।
राष्ट्रपति से मिलीं बीजेपी की महिला नेता
बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष रुप कुमारी चौधरी के नेतृत्व में पार्टी की महिला नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस सांसद अकोइजम के खिलाफ शिकायत सौंपते हुए उनके पद से हटाने की मांग की।
बीजेपी नेताओं का आरोप है कि सांसद पर 11 छात्राओं के यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं और जेएनयू की आंतरिक जांच में उन्हें दोषी पाया गया है। इसी आधार पर पार्टी की महिला नेताओं ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी से पूछे सवाल
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि 11 छात्राओं से जुड़े मामले में गंभीर आरोप और सबूत होने के बावजूद राहुल गांधी चुप क्यों हैं।
बांसुरी स्वराज ने बीजेपी की महिला नेताओं के साथ कांग्रेस नेताओं की ओर से कथित बदसलूकी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देने की मांग की।
अकोइजम बोले- मुझे झूठा फंसाया जा रहा है
बीजेपी के आरोपों के बीच कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने अपना पक्ष रखते हुए यौन उत्पीड़न के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया जा रहा है।
सांसद ने जेएनयू प्रशासन की जांच प्रक्रिया और कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि प्रशासन ने उनके खिलाफ फैसला लेते समय उचित नियमों का पालन नहीं किया और यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।
जांच और बर्खास्तगी के समय पर उठाए सवाल
अकोइजम ने जांच प्रक्रिया की समय-सीमा पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें दोपहर 12 बजकर 40 मिनट पर जांच बंद होने की जानकारी मिली थी। इसके करीब 20 मिनट बाद, लगभग एक बजे, कुलपति ने उन्हें बर्खास्त कर दिया।
सांसद ने सवाल किया कि आधे घंटे से भी कम समय में जांच रिपोर्ट कैसे तैयार हुई, कुलपति ने उसे पढ़ा और फिर बर्खास्तगी का फैसला भी सुना दिया। उन्होंने इस प्रक्रिया को हैरान करने वाला बताया।
जेएनयू प्रशासन पर नियमों की अनदेखी का आरोप
कांग्रेस सांसद ने जेएनयू प्रशासन की कार्रवाई की तुलना ‘खाप पंचायत’ से करते हुए आरोप लगाया कि उनके मामले में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साबित नहीं हो पाएंगे।
हालांकि, अकोइजम के इन दावों और जांच प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
मणिपुर का मुद्दा उठाने पर साजिश का दावा
अकोइजम ने इस पूरे मामले को बीजेपी की साजिश करार दिया। उनका आरोप है कि वह मणिपुर के मुद्दों और वहां के लोगों की आवाज लगातार उठाते रहे हैं, इसलिए उन्हें चुप कराने की कोशिश की जा रही है।
इस मामले में बीजेपी सांसद के खिलाफ कार्रवाई और पद से हटाने की मांग कर रही है, जबकि अकोइजम आरोपों को खारिज करते हुए जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।

