जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार किए गए सीजेपी नेताओं के समर्थन में राहुल गांधी ने पोस्ट किया। दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजा गया है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दोनों के समर्थन में आवाज उठाई। राहुल गांधी की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दिपके ने उनका आभार जताया और गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए धन्यवाद दिया।
‘तिरंगा लहराना अपराध नहीं’
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने युवाओं को इसके लिए जेल भेजने को कायरता बताया। राहुल गांधी के मुताबिक, छात्र, युवा, पत्रकार और इंडिया गठबंधन अलग-अलग बैनर के तहत एक ही मुद्दे पर आवाज उठा रहे हैं और अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और वे इसे वापस लेकर रहेंगे।
राहुल गांधी की पोस्ट पर अभिजीत दिपके ने धन्यवाद देते हुए लिखा कि सौरव दास और आशुतोष रांका की कथित अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए वह नेता प्रतिपक्ष के आभारी हैं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद 14 लोग हिरासत में
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे समेत सीजेपी के कुल 14 सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे। पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर को हाल ही में प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद इन लोगों ने एक निजी परिसर से होकर वहां पहुंचने की कोशिश की।
पुलिस के अनुसार, उन्हें रोकने की कोशिश की गई, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली। इसके बाद सभी 14 लोगों को हिरासत में लिया गया।
दो एफआईआर दर्ज, तीन नेताओं पर एहतियाती कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं। पहली एफआईआर संख्या 289/26 कनॉट प्लेस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223(ए), 332 और 61(2) के तहत दर्ज की गई। दूसरी एफआईआर संख्या 128/26 संसद मार्ग थाने में बीएनएस की धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) के तहत दर्ज हुई। दोनों एफआईआर 13 अक्टूबर 2026 को दर्ज की गई थीं।
पुलिस के मुताबिक, बार-बार कानून का उल्लंघन करने और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका के आधार पर सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे के खिलाफ एहतियाती कार्रवाई की गई। पुलिस ने आरोप लगाया कि ये लोग सोशल मीडिया के जरिए दूसरों को भी ऐसी गतिविधियों के लिए उकसाने की कोशिश कर रहे थे।
सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल भेजे गए
पुलिस के अनुसार, तीनों नेताओं को बुधवार को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एसईएम) की अदालत में पेश किया गया। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई।
सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया, जबकि अजिंक्य शिंदे को पांच हजार रुपये का बॉन्ड भरने के बाद रिहा कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, शिंदे को छह महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने की शर्त पर रिहाई मिली। पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका को दोहराव से अपराध करने वाला भी बताया है।
दिल्ली पुलिस के दावे पर सीजेपी ने उठाए सवाल
दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा कि सीजेपी के सदस्य एक निजी परिसर से होते हुए जंतर-मंतर पहुंचे थे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों ने उनकी ड्यूटी में बाधा डाली। पुलिस के मुताबिक, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए कार्रवाई की गई।
वहीं, सीजेपी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने दिल्ली पुलिस पर गलत बयान देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने अदालत में जंतर-मंतर पर अन्य प्रदर्शनकारियों को बुलाए जाने की बात कही, जो उनके मुताबिक सही नहीं है। इस तरह गिरफ्तारी को लेकर पुलिस और सीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

