बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी पहल
बच्चों में बढ़ते तनाव, असफलता का डर, अवसाद और मानसिक दबाव को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अब स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता (Mental Health Support) अनिवार्य होगी। इसके लिए एक राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पोर्टल तैयार किया जाएगा और देशभर के स्कूलों के लिए यूनिफॉर्म नीति लागू की जाएगी।
बिहार सहित पूरे देश के सरकारी और निजी स्कूलों को इस नीति का पालन करना होगा। शिक्षा मंत्रालय ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
🧠 बच्चे और शिक्षक ले सकेंगे ऑनलाइन परामर्श
शिक्षा मंत्रालय की ओर से बनने वाले इस मानसिक स्वास्थ्य पोर्टल पर—
- देशभर के मान्यता प्राप्त मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का डेटाबेस होगा
- स्कूली छात्र और शिक्षक सीधे ऑनलाइन परामर्श ले सकेंगे
- यह पोर्टल विशेषज्ञों और स्कूलों के बीच डिजिटल ब्रिज का काम करेगा
इस संबंध में मंत्रालय स्तर पर बैठक भी हो चुकी है।
🏫 सभी स्कूलों को करना होगा यूनिफॉर्म नीति का पालन
शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम की तर्ज पर इस नीति को सभी स्कूलों के लिए बाध्यकारी बनाया जाएगा।
अनिवार्य प्रावधान:
- हर स्कूल में मानसिक स्वास्थ्य समिति का गठन
- समिति में शामिल होंगे:
- प्रधानाचार्य
- शिक्षक
- अभिभावक
- काउंसलर
- गोपनीय शिकायत निवारण तंत्र, जहां छात्र बिना डर अपनी समस्या रख सकें
इस निर्णय का उद्देश्य बच्चों में बढ़ते अवसाद, चिंता, भय, तनाव और आत्महत्या के विचारों की रोकथाम करना है।
📊 सालाना समीक्षा होगी अनिवार्य
स्कूलों को यह जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी कि—
- नीति का पालन कितना हुआ
- कितने छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता मिली
- शिकायतों और परामर्श की संख्या
इन रिपोर्टों की सालाना समीक्षा की जाएगी।
⚠️ 41% स्कूलों में एंटी-बुलिंग व्यवस्था नहीं
एनसीईआरटी द्वारा बिहार के 3840 स्कूलों में किए गए सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ—
- 41% स्कूलों में एंटी-बुलिंग या छात्र सुरक्षा से जुड़ी कोई व्यवस्था नहीं
- कई स्कूलों में इस विषय पर कोई नीति ही नहीं है
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार यह नई नीति सुखदेव साहा जजमेंट के आधार पर तैयार की जा रही है, जिसमें छात्र कल्याण और सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है।

