शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में दावा किया है कि 2024 से 2026 के बीच देशभर में 1.21 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां बंद हुईं। पार्टी ने इसे रोजगार और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकट बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में संसद में पेश सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच देशभर में 1,21,805 एमएसएमई इकाइयां बंद हो गईं, जिससे लाखों युवाओं का रोजगार प्रभावित हुआ।
रोजगार के बजाय धार्मिक मुद्दों पर ध्यान देने का आरोप
संपादकीय में शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देश में पुराने उद्योग बंद होते रहे, जबकि नए उद्योगों की केवल बातें की गईं। पार्टी का कहना है कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें धार्मिक मुद्दों में उलझाया जा रहा है, जिसका असर रोजगार और औद्योगिक विकास पर पड़ा है।
महाराष्ट्र में सबसे अधिक इकाइयां बंद होने का दावा
संपादकीय के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में महाराष्ट्र पहले स्थान पर है, जहां 28,764 एमएसएमई इकाइयां बंद हुईं। इसके बाद तमिलनाडु (14,176), गुजरात (11,150) और राजस्थान (9,881) का स्थान है। पार्टी ने दावा किया कि ये आंकड़े सरकार के निवेश और रोजगार सृजन के दावों से मेल नहीं खाते।
35 लाख करोड़ रुपये के ऋण के बावजूद संकट
शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऋण उपलब्ध कराए गए। इसके बावजूद उद्यमियों को बढ़ती लागत, बाजार की चुनौतियों और प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे बड़ी संख्या में उद्योग बंद हुए हैं।
बीमार उद्योगों के पुनर्वास की मांग
पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार नए निवेश लाने पर जोर देती है, लेकिन पहले से संकटग्रस्त उद्योगों के पुनर्वास के लिए कोई प्रभावी योजना नहीं है। संपादकीय में कहा गया कि उद्योगों के बंद होने से बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) बढ़ रहे हैं और हजारों युवाओं की नौकरियां समाप्त हो रही हैं। शिवसेना (यूबीटी) ने सरकार से एमएसएमई क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

