उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी अपनी चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 3 और 4 जुलाई को लखनऊ का दौरा करेंगे। जनवरी 2026 में पदभार संभालने के बाद यह उनका उत्तर प्रदेश का पहला बड़ा संगठनात्मक दौरा माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी और RSS के साथ होगी अहम बैठक
दो दिवसीय इस दौरे के दौरान नितिन नबीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारी अरुण कुमार के साथ समन्वय बैठक करेंगे।
इस बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ-साथ भाजपा की नई राज्य टीम भी शामिल होगी। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी चुनावों के लिए संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाना है।
‘मिशन उत्तर प्रदेश’ की रणनीति पर फोकस
सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन इस दौरे में नई टीम को भाजपा के ‘मिशन उत्तर प्रदेश’ के लक्ष्यों और रणनीतियों से अवगत कराएंगे। संगठन स्तर पर बूथ मैनेजमेंट और जमीनी कार्यकर्ताओं से फीडबैक को लेकर भी विस्तृत चर्चा होगी।
बताया जा रहा है कि यह अभ्यास RSS और भाजपा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे पहले इसी तरह की रणनीतिक बैठक मध्य प्रदेश में भी की जा चुकी है।
OBC वोट बैंक पर रहेगा खास फोकस
भाजपा इस बार ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) मतदाताओं पर विशेष ध्यान दे रही है। पार्टी की रणनीति उन उपजातियों को साधने पर केंद्रित है, जो चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
वहीं, समाजवादी पार्टी द्वारा ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिशों के बीच भाजपा अपनी रणनीति को और धार देने में जुटी है। संगठन स्तर पर बूथ सत्यापन का पहला चरण पूरा हो चुका है, जबकि दूसरा चरण चुनाव से ठीक पहले किया जाएगा।
जमीनी स्तर पर फीडबैक लेगी भाजपा
नितिन नबीन अपने दौरे में जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करेंगे और उनके सुझावों के आधार पर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देंगे। पार्टी का फोकस संगठन को और मजबूत करने और बूथ स्तर तक पकड़ बढ़ाने पर है।
राजनीतिक माहौल और विवादों के बीच बैठक
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब राज्य की राजनीति राम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े कथित चंदा घोटाले को लेकर गरमाई हुई है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमले तेज कर दिए हैं।
हाल ही में SIT रिपोर्ट और कुछ गिरफ्तारियों के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक चर्चा में आ गया है। ऐसे में भाजपा की यह बैठक आगामी चुनावी रणनीति को धार देने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
चुनावी तैयारी में जुटी भाजपा
भाजपा का लक्ष्य 2027 के विधानसभा चुनावों में अपनी स्थिति को और मजबूत करना है। संगठन, सरकार और RSS के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर पार्टी अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी है।

