वैश्विक तनाव और बढ़ती बॉन्ड यील्ड का असर, MCX पर सोना 1,500 रुपये से ज्यादा टूटा, चांदी में भी भारी गिरावट
भारतीय सर्राफा बाजार में आज सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। नवंबर के बाद पहली बार दोनों कीमती धातुओं के दामों में इतनी तेज कमजोरी देखने को मिली है। वैश्विक बाजार में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी है। इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं ने सोना और चांदी दोनों पर दबाव बनाया है।
MCX पर सोने में 1 प्रतिशत की बड़ी गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कारोबार की शुरुआत के साथ ही सोने में भारी बिकवाली देखने को मिली। सोने का भाव 1,502 रुपये की गिरावट के साथ 1,46,444 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स (COMEX) पर भी सोने की कीमतों में कमजोरी रही और यह 4,132.80 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया। बाजार विश्लेषकों के अनुसार यह पिछले कई महीनों के निचले स्तरों में से एक है, जिसने निवेशकों को चौंका दिया है।
चांदी की चमक भी पड़ी फीकी
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। MCX पर चांदी 5,800 रुपये से अधिक टूटकर 2,30,493 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का भाव 64.59 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। हालांकि औद्योगिक मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन ऊंची ब्याज दरों और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निवेशक फिलहाल चांदी में भी सतर्क रुख अपना रहे हैं।
क्यों टूट रहे हैं सोना-चांदी के दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक सोना और चांदी पर दबाव की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है। ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।
महंगे कच्चे तेल से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। यदि महंगाई बढ़ती है तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकता है। ऐसे माहौल में निवेशक ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं, जबकि सोना और चांदी ब्याज नहीं देते, जिससे इनकी मांग प्रभावित होती है।
निवेशकों और खरीदारों के लिए क्या है संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट अल्पकालिक दबाव का परिणाम हो सकती है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की नीतियां आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा तय करेंगी।
वहीं, शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन से पहले सोने और चांदी की कीमतों में आई इस गिरावट को आम उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी का अच्छा अवसर माना जा रहा है। यदि कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो आभूषण बाजार में मांग बढ़ सकती है।
आगे कैसा रहेगा बाजार?
विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की चाल, डॉलर इंडेक्स और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े संकेत सोना-चांदी की कीमतों को प्रभावित करेंगे। यदि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
फिलहाल निवेशकों और ग्राहकों की नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर कीमती धातुओं की अगली दिशा तय होगी।

