शरद पवार से मुलाकात के बाद ‘वर्षा’ पहुंचे जयंत पाटिल, NDA में शामिल होने की अटकलों ने पकड़ा जोर
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से देर रात हुई मुलाकात ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ में हुई इस बैठक के बाद एनसीपी (एसपी) के भविष्य और संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
बताया जा रहा है कि इस मुलाकात से पहले जयंत पाटिल ने दक्षिण मुंबई स्थित शरद पवार के आवास ‘सिल्वर ओक’ में उनसे भी मुलाकात की थी। इसके तुरंत बाद वे मुख्यमंत्री फडणवीस से मिलने पहुंचे। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों को और हवा दे दी है।
131वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर बढ़ी सियासी हलचल
राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार 131वां संविधान संशोधन विधेयक फिर से पेश करने की तैयारी कर रही है। इस विधेयक को पारित कराने के लिए भाजपा सहयोगी दलों के साथ-साथ कुछ विपक्षी दलों का समर्थन भी जुटाने की कोशिश में है।
हालांकि विपक्ष का आरोप है कि महिला आरक्षण से जुड़े इस विधेयक के जरिए भविष्य के परिसीमन (Delimitation) का रास्ता तैयार किया जा रहा है। इसी वजह से राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
बैठक में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी रहे मौजूद
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी मौजूद थे। सभी नेताओं के बीच लंबी चर्चा हुई, लेकिन बैठक के एजेंडे को लेकर किसी भी पक्ष ने आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है।
शरद पवार गुट में बढ़ सकती है राजनीतिक चुनौती
सूत्रों का दावा है कि एनसीपी (एसपी) के कुछ विधायक विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिलने और प्रशासनिक देरी से नाराज बताए जा रहे हैं। इसी वजह से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने की चर्चा है।
बताया जा रहा है कि पार्टी के कुछ विधायक सत्ता पक्ष के साथ जाने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
‘सिल्वर ओक’ से ‘वर्षा’ तक की मुलाकात बनी चर्चा का विषय
जयंत पाटिल का पहले शरद पवार से मिलना और उसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री फडणवीस के सरकारी आवास पहुंचना पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना रहा है। फिलहाल इस मुलाकात के पीछे वास्तविक कारण क्या था, इसे लेकर किसी भी नेता ने सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुलाकात के मायने और स्पष्ट हो सकते हैं। फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर सस्पेंस बरकरार है।

