एनएसई क्लियरिंग 17 अगस्त से आर3 सीरीज शुरू करेगी, जिसके तहत चुनिंदा शेयरों को सिर्फ तीन कारोबारी दिनों के लिए उधार देकर निवेशक लेंडिंग फीस कमा सकेंगे
अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं और लंबे समय के लिए अपने डीमैट खाते में शेयर खरीदकर रखते हैं, तो अब इन्हीं शेयरों से अतिरिक्त कमाई का मौका मिल सकता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की सब्सिडियरी कंपनी एनएसई क्लियरिंग लिमिटेड 17 अगस्त से सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग यानी एसएलबी के तहत नया सिस्टम शुरू करने जा रही है। इसके जरिए निवेशक अपने शेयरों को महज तीन कारोबारी दिनों के लिए उधार देकर लेंडिंग फीस कमा सकेंगे।
इस व्यवस्था के तहत निवेशकों को अपने शेयर बेचने की जरूरत नहीं होगी। वे कुछ समय के लिए अपनी होल्डिंग उधार देकर उससे अतिरिक्त आय हासिल कर सकेंगे।
सिर्फ तीन कारोबारी दिनों में पूरा होगा लेनदेन
सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग व्यवस्था पहले से बाजार में मौजूद है, लेकिन अब इसे निवेशकों के लिए और आसान बनाया जा रहा है। एनएसई क्लियरिंग के नए सर्कुलर के मुताबिक, नई व्यवस्था को आर3 सीरीज के नाम से जाना जाएगा और यह हर दिन ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहेगी।
इसमें जिस दिन शेयरों को उधार देने का सौदा होगा, उसे टी डे माना जाएगा। इसका पहला सेटलमेंट अगले कारोबारी दिन यानी टी+1 पर होगा, जबकि शेयरों की वापसी का दूसरा चरण टी+3 पर पूरा होगा।
इस तीन दिन की अवधि में शनिवार, रविवार और शेयर बाजार की छुट्टियां शामिल नहीं होंगी।
सिर्फ चुनिंदा शेयर ही किए जा सकेंगे लेंड
हर शेयर को इस नई व्यवस्था के तहत उधार देना संभव नहीं होगा। आर3 सीरीज में केवल उन्हीं चुनिंदा शेयरों को शामिल किया जाएगा, जो इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग के लिए पात्र हैं।
यानी फ्यूचर एंड ऑप्शन यानी एफएंडओ सेगमेंट में शामिल शेयरों को ही इस तीन कारोबारी दिनों वाली व्यवस्था के तहत लेंड किया जा सकेगा।
पुराने सिस्टम से कैसे अलग है आर3 सीरीज?
मौजूदा लेंडिंग कॉन्ट्रैक्ट्स में कुछ परिस्थितियों में कॉन्ट्रैक्ट समय से पहले खत्म किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, किसी कंपनी की वार्षिक आम बैठक या असाधारण आम बैठक होने पर पुराने सिस्टम में कॉन्ट्रैक्ट को समय से पहले बंद करने की व्यवस्था हो सकती है।
नई आर3 सीरीज में ऐसा नहीं होगा। किसी कंपनी की एजीएम या ईजीएम होने की वजह से तीन दिन का कॉन्ट्रैक्ट बीच में रद्द नहीं किया जाएगा।
हालांकि, इसकी अवधि बेहद कम होने के कारण निवेशकों को रीपेमेंट, रिकॉल या रोलओवर जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी। वहीं जोखिम प्रबंधन, क्लियरिंग और कॉरपोरेट एक्शन से जुड़े अन्य नियम बाजार व्यवस्था के अनुसार लागू रहेंगे।
निवेशकों और ट्रेडर्स दोनों को फायदा
सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग मैकेनिज्म निवेशकों को अपनी लंबे समय की होल्डिंग से अतिरिक्त आय कमाने का विकल्प देता है। जो निवेशक अपने शेयर लंबे समय तक बेचने की योजना नहीं बना रहे हैं, वे उन्हें लेंड करके लेंडिंग फीस हासिल कर सकते हैं।
दूसरी तरफ, शॉर्ट-सेलिंग करने वाले ट्रेडर्स को भी इसका फायदा मिलेगा। उन्हें कुछ दिनों के लिए शेयरों की जरूरत होने पर लंबे समय का लेंडिंग कॉन्ट्रैक्ट लेने की आवश्यकता नहीं होगी। वे अपनी जरूरत के मुताबिक सिर्फ तीन कारोबारी दिनों के लिए शेयर उधार ले सकेंगे।
इस पूरी प्रक्रिया में एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉरपोरेशन लेनदेन की क्लियरिंग और सेटलमेंट व्यवस्था को संभालेंगे, जिससे शेयरों की लेंडिंग और वापसी की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से पूरी होगी।

