पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स हुआ शून्य, डीजल और एटीएफ पर भी बड़ी राहत

Thecity news
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केंद्र सरकार ने स्वतंत्रता दिवस की आधी रात को तेल क्षेत्र के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती की घोषणा की है। इस फैसले से पेट्रोलियम क्षेत्र को राहत मिलेगी।

सरकार के नए फैसले के तहत पेट्रोल पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। हालांकि इसका आम जनता की जेब या पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह टैक्स बड़ी तेल कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफे पर लगाया जाता है।

पेट्रोल और डीजल पर टैक्स कटौती

नए आदेश के मुताबिक सरकार ने पेट्रोल पर 3.50 रुपये और डीजल पर 1.50 रुपये प्रति लीटर विंडफॉल टैक्स घटाया है। डीजल के निर्यात पर शुल्क 25.50 रुपये से घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

वहीं पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली 3.50 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी को घटाकर शून्य कर दिया गया है।

एटीएफ पर भी ढाई रुपये की राहत

हवाई ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर भी टैक्स में कटौती की गई है। पहले एटीएफ पर निर्यात शुल्क 22 रुपये प्रति लीटर था, जिसे अब घटाकर 19.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

इस तरह एटीएफ के निर्यात पर प्रति लीटर 2.50 रुपये की राहत दी गई है।

कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय स्थिति

सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। वर्तमान में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। इससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

विंडफॉल टैक्स का इतिहास और समीक्षा

इसी साल मार्च में ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष के बाद कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने पर सरकार ने फिर से विंडफॉल टैक्स लागू किया था। सरकार ने पहली बार जुलाई 2022 में कच्चे तेल से होने वाले असाधारण मुनाफे पर यह टैक्स लगाया था।

सरकार अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर हर दो सप्ताह में विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करती है।

आम उपभोक्ताओं पर असर

विंडफॉल टैक्स में बदलाव का आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर सीधा असर नहीं पड़ता है। यह टैक्स घरेलू स्तर पर कच्चा तेल निकालने और विदेशों में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करने वाली बड़ी कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफे पर लगाया जाता है।

टैक्स में कटौती से ONGC और Reliance Industries जैसी कंपनियों को राहत मिल सकती है।

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