वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता अब स्थायी स्थिति बन चुकी है, इसलिए भारत को निजी निवेश, रणनीतिक संसाधन और नवाचार पर जोर देना होगा।
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निजी क्षेत्र से देश में निवेश चक्र की अगुवाई करने की अपील की है। उन्होंने खास तौर पर रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) और इनोवेशन में निजी निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। नई दिल्ली में आयोजित पांचवें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता अब स्थायी स्थिति बन चुकी है और आने वाले वर्षों के लिए भारत को लगातार तैयारी करनी होगी।
आरएंडडी में भारत अभी पीछे
सीतारमण ने कहा कि भारत का आरएंडडी पर खर्च जीडीपी का सिर्फ 0.83 फीसदी है, जबकि ओईसीडी देशों का औसत 2.7 फीसदी है। भारत के कुल आरएंडडी खर्च में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी भी करीब 36 फीसदी है। उनके मुताबिक निवेश का स्तर और उसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी दोनों बढ़ाना देश की इनोवेशन क्षमता मजबूत करने के लिए जरूरी है।
सरकार की ओर से रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की आरडीआई योजना भी लाई गई है। इसका उद्देश्य भारत को सिर्फ ‘मेड इन इंडिया’ से आगे बढ़ाकर ‘इमैजिन्ड एंड मेड इन इंडिया’ की दिशा में ले जाना है।
7.8 फीसदी की आर्थिक वृद्धि का जिक्र
वित्त मंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा मजबूती का जिक्र करते हुए कहा कि यह स्थिति कई वर्षों के दौरान तैयार हुई है। उन्होंने वित्तीय अनुशासन, बुनियादी ढांचे में निवेश, बैंकिंग सुधार और विभिन्न संरचनात्मक सुधारों को इसका आधार बताया। पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8 फीसदी रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने कर व्यवस्था, वित्तीय क्षेत्र, दिवाला कानून, कारोबारी नियमन, बुनियादी ढांचे की योजना और सार्वजनिक प्रशासन में लगातार सुधार किए हैं। अब अगला लक्ष्य इन क्षमताओं को ज्यादा उत्पादकता, बेहतर रोजगार और व्यापक अवसरों में बदलना है।
रणनीतिक संसाधनों की सुरक्षा भी अहम
सीतारमण ने आने वाले वर्षों के लिए रणनीतिक संसाधनों की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि जरूरी संसाधनों और आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा व्यापक आर्थिक नीति का अहम हिस्सा है।
इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था को खुला और नियम आधारित बनाए रखने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक देशों को अपने व्यापारिक साझेदारों में विविधता लानी चाहिए, बाजार खुले रखने चाहिए और व्यापार को ज्यादा स्थिर और पूर्वानुमान योग्य बनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
वित्त मंत्री ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में भी सुधार की वकालत की। उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय विकास बैंकों में सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए ज्यादा बड़ा, तेज और भरोसेमंद दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने की दिशा में काम होना चाहिए।

