मेघालय स्टेट कोटा के छात्र ने काउंसलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उससे कम अंक वाले छात्रों को बेहतर कॉलेज मिले।
शिलांग, 6 अक्टूबर। NEET UG 2026 पास करने वाले मेघालय के एक छात्र ने MBBS काउंसलिंग और सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अपनी आवंटित सीट छोड़ दी। छात्र ने आरोप लगाया कि उसे उसकी मेरिट और पसंद के मुताबिक कॉलेज नहीं दिया गया, जबकि उससे कम अंक पाने वाले कुछ छात्रों को उसकी पसंद के कॉलेजों में सीट मिल गई। ये आरोप छात्र ने लगाए हैं और स्वतंत्र रूप से इनकी पुष्टि नहीं हुई है।
चौथी पसंद का कॉलेज मिलने का दावा
छात्र के मुताबिक, NEET पास करने के बाद डायरेक्टरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DHS) की काउंसलिंग में उम्मीदवारों ने दस्तावेज जमा किए और मेरिट के आधार पर कॉलेजों की पसंद बताई। पहली अलॉटमेंट लिस्ट में उसे अपनी चौथी पसंद का कॉलेज मिला।
उसने दावा किया कि उससे कम अंक वाले कुछ छात्रों को नॉर्थ ईस्टर्न इंदिरा गांधी रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज यानी NEIGRIHMS में सीट मिली, जबकि उसे रिम्स, रांची आवंटित किया गया।
मेघालय में 2026-27 के MBBS दाखिलों को लेकर पहले भी सीट अलॉटमेंट पर सवाल उठ चुके हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने सितंबर में पुरानी अलॉटमेंट लिस्ट वापस लेकर नई लिस्ट जारी करने की प्रक्रिया अपनाई थी।
दूसरे राउंड में भी सीट नहीं मिलने का आरोप
छात्र ने बताया कि उसने VPP की स्टेट यूथ विंग से संपर्क किया, जिसके बाद उसे काउंसलिंग के दूसरे राउंड में बुलाया गया। उसके अनुसार, इस दौरान उसने NEIGRIHMS को पहली पसंद के तौर पर चुना, लेकिन उसे बताया गया कि वहां कोई सीट खाली नहीं है।
छात्र का दावा है कि इसके बाद उसने GMCH, गुवाहाटी और RIMS, इंफाल को विकल्प के तौर पर चुना, लेकिन वहां भी उसे सीट उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई। इसके बाद उसने जोरहाट में आवंटित सीट स्वीकार कर ली।
हालांकि, बाद में जारी सूची देखने के बाद छात्र ने दावा किया कि उससे कम अंक पाने वाले 2 छात्रों को RIMS, इंफाल में सीट मिल गई, जबकि उसे पहले वहां कोई सीट खाली नहीं होने की बात बताई गई थी। इसी आधार पर उसने काउंसलिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाया।
छात्र ने क्यों छोड़ी MBBS सीट?
छात्र ने कहा कि वह अपनी मेरिट और पसंद के अनुरूप मेडिकल कॉलेज चाहता था। काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर असंतोष के बाद उसने आवंटित MBBS सीट छोड़ने का फैसला किया।
मेघालय सरकार के 2026-27 के संयुक्त काउंसलिंग SOP में MBBS दाखिलों के लिए 4 राउंड की काउंसलिंग, सीट सरेंडर, खाली सीटों और शिकायत निवारण की प्रक्रिया का प्रावधान है। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने काउंसलिंग से जुड़ी शिकायतों के लिए अलग ग्रिवांस रिड्रेसल व्यवस्था भी जारी की है।
राजस्थान में भी हजारों MBBS सीटें खाली
इसी बीच राजस्थान के निजी मेडिकल कॉलेजों में NEET UG काउंसलिंग के तीसरे राउंड के बाद भी बड़ी संख्या में MBBS सीटें खाली रहने की रिपोर्ट सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, निजी कॉलेजों की सामान्य कोटे की 3336 MBBS सीटों में से 1275 पर ही दाखिला हुआ, जबकि 2061 सीटें खाली रहीं। यानी 61.78% सीटें तीसरे राउंड के बाद भी नहीं भर सकीं।
हालांकि, राजस्थान के सीट मैट्रिक्स और मेघालय के छात्र की काउंसलिंग का मामला अलग-अलग हैं। राजस्थान में निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस और सीटों की उपलब्धता को लेकर स्थिति सामने आई है, जबकि मेघालय में छात्र ने अपने व्यक्तिगत सीट अलॉटमेंट को लेकर सवाल उठाए हैं।

