Supreme Court ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की विवादित टिप्पणी—‘स्तन दबाने और पायजामे की डोरी खींचने से रेप सिद्ध नहीं’—पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। CJI सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी असंवेदनशील टिप्पणियां पीड़ितों पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। कोर्ट जल्द जारी करेगा विशेष दिशानिर्देश।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को संकेत दिया कि यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में अदालतों द्वारा की जाने वाली ‘असंवेदनशील’ टिप्पणियों से पीड़ितों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को रोकने के लिए जल्द ही विशेष दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि कई बार अदालतों की असंवेदनशील टिप्पणियां पीड़ितों पर ‘डर पैदा करने वाला प्रभाव’ डालती हैं और कभी-कभी शिकायत वापस लेने के लिए भी इनका उपयोग किया जाता है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट का विवादित फैसला
यह सुनवाई उस स्वतः संज्ञान का हिस्सा थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में लिया था। मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक विवादित फैसले से जुड़ा था, जिसमें टिप्पणी की गई थी कि —
“सिर्फ स्तन दबाने और पायजामे की डोरी खींचने से बलात्कार का अपराध सिद्ध नहीं होता।”
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि यह फैसला रद्द किया जाएगा और आपराधिक मुकदमा बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा:
“हम हाई कोर्ट का आदेश रद्द करेंगे और ट्रायल आगे बढ़ने देंगे।”
असंवेदनशील टिप्पणियों की सूची कोर्ट के सामने रखी गई
सुनवाई के दौरान अमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने अदालतों द्वारा की गई कई चिंताजनक टिप्पणियों की ओर ध्यान दिलाया।
इनमें शामिल थे:
- इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी कि “रात में हुई घटना आमंत्रण जैसी लगती है।”
- कोलकाता और राजस्थान हाई कोर्ट के अन्य उदाहरण
- हाल ही में एक इन-कैमरा ट्रायल में नाबालिग पीड़िता से अनुचित पूछताछ
इन उदाहरणों ने कोर्ट को गंभीर रूप से चिंतित किया।
शीर्ष अदालत तैयार करेगी दिशानिर्देश
CJI ने कहा कि निचली अदालतों में ऐसी टिप्पणियां अक्सर अनदेखी रह जाती हैं और पीड़ितों पर मानसिक दबाव बढ़ाती हैं।
उन्होंने कहा कि अदालत व्यापक दिशानिर्देश तैयार करेगी, ताकि:
- संवेदनशील मामलों में न्यायाधीशों की भाषा मर्यादित हो
- पीड़ितों की गरिमा सुरक्षित रहे
- ट्रायल के दौरान कोई मानसिक उत्पीड़न न हो
CJI ने आश्वासन दिया कि पीड़ितों के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

