भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति पुतिन की दिल्ली में हुई बैठक में विपक्ष के नेताओं को न बुलाए जाने पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई। कांग्रेस का कहना है कि यह परंपराओं और संविधान का उल्लंघन है।
कांग्रेस ने पुतिन की दिल्ली मीटिंग में विपक्ष के नेताओं को न बुलाए जाने पर जताई आपत्ति
भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में हुई मीटिंग में विपक्ष के नेताओं को न बुलाए जाने पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है।
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने कहा कि रूस के साथ भारत के रिश्तों की नींव कांग्रेस के समय में ही रखी गई थी।
परंपराओं का उल्लंघन
तिवारी ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं को न बुलाना कॉन्स्टिट्यूशनल और डेमोक्रेटिक परंपराओं का उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि पिछले 65 वर्षों में जब कांग्रेस केंद्र में सत्ता में थी, तो नेता प्रतिपक्ष को हमेशा प्रेसिडेंट की तरफ से प्रोटोकॉल के हिसाब से वेलकम सेरेमनी में बुलाया जाता था।
इतिहास और दोस्ती का महत्व
तिवारी ने कहा कि सन 1971 की लड़ाई में अमेरिका ने बंगाल की खाड़ी में एयरक्राफ्ट कैरियर भेजकर पाकिस्तान का समर्थन किया था, जबकि रूस ने पंडित नेहरू, शास्त्री और इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत को मदद की पेशकश की।
उन्होंने कहा कि उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की विदेश नीति और डिप्लोमेसी की वजह से ही भारत अगस्त 1971 में शांति, दोस्ती और सहयोग का भारत-सोवियत समझौता साइन कर पाया था।
कांग्रेस का कहना है कि रूस के साथ बनी दोस्ती समय-समय पर भारत के लिए लाभदायक रही है, और रूस ने हमेशा भारत का साथ दिया।

