
📰 H1: FD vs RD: कौन-सा है बेहतर निवेश विकल्प? जानिए अंतर और फायदे
भविष्य की वित्तीय सुरक्षा के लिए लोग समय रहते बचत और निवेश शुरू कर देते हैं। इसके लिए कई निवेश विकल्प मौजूद हैं, जिनमें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रेकरिंग डिपॉजिट (RD) सबसे भरोसेमंद माने जाते हैं।
दोनों ही सुरक्षित, आसान और निश्चित रिटर्न प्रदान करते हैं, लेकिन अक्सर सवाल उठता है कि दोनों में से किसे चुनना चाहिए?
आइए समझते हैं FD और RD के बीच मुख्य अंतर।
H2: क्या है FD और RD?
H3: फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) क्या है?
फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेशक एक निश्चित अवधि के लिए एकमुश्त राशि जमा करते हैं।
यह अवधि आमतौर पर 1 साल से लेकर 10 साल तक हो सकती है।
इस दौरान बैंक आपकी राशि को लॉक कर देता है और आपको तय ब्याज दर के अनुसार रिटर्न मिलता है।
H3: रेकरिंग डिपॉजिट (RD) क्या है?
RD यानी आवर्ती जमा में निवेशक हर महीने एक निश्चित राशि जमा करते हैं।
यह उन लोगों के लिए खास है जो एकमुश्त राशि जमा नहीं कर सकते।
RD में छोटी-छोटी मासिक किश्तों से लंबी अवधि में एक अच्छा फंड तैयार किया जा सकता है।
H2: किसमें मिलेगा ज्यादा फायदा — FD या RD?
H3: FD पर मिलते हैं ज्यादा रिटर्न
ब्याज दर के हिसाब से देखें तो FD पर RD की तुलना में ज्यादा ब्याज मिलता है।
इसी वजह से FD पर मिलने वाला रिटर्न भी ज्यादा होता है।
यह विकल्प उन लोगों के लिए बेहतर है जो एक बार में बड़ा पैसा निवेश कर सकते हैं।
H3: RD वेतनभोगियों के लिए बेहतर विकल्प
अगर आपकी आय सैलरी आधारित है या आपके पास एक साथ बड़ी राशि नहीं है, तो RD एक उत्कृष्ट विकल्प साबित हो सकता है।
RD में छोटी-छोटी बचत से आप आसानी से लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं।
H3: समय से पहले पैसा निकालने पर जुर्माना
दोनों निवेश विकल्पों — FD और RD — में
- मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालने पर
- बैंक पेनल्टी या ब्याज में कटौती कर सकता है।
इसलिए अवधि तय करके ही निवेश करना चाहिए।

