
महाराष्ट्र सरकार ने सुशासन और जवाबदेही को मजबूत करने के उद्देश्य से अपने अधिकारियों के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
मुख्य सचिव राजेश कुमार द्वारा जारी सरकारी परिपत्र (जीआर) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों — यानी सांसदों और विधायकों — को उचित सम्मान देना प्रशासन की विश्वसनीयता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
गुरुवार को जारी इस जीआर में अधिकारियों के व्यवहार, शिष्टाचार और कार्य-शैली से जुड़े कई जरूरी निर्देश शामिल किए गए हैं।
H2: अधिकारियों के लिए अनिवार्य व्यवहार नियम
नए दिशानिर्देशों में अधिकारियों के लिए कई स्पष्ट और कड़े निर्देश तय किए गए हैं:
H3: सीट से उठना अनिवार्य
जब भी कोई विधायक या सांसद कार्यालय में प्रवेश या निकास करे, अधिकारियों को अपनी सीट से उठकर उनका सम्मान करना होगा।
H3: पूरे शिष्टाचार से पेश आना
अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान शिष्टाचार, सम्मान और व्यावसायिकता बनाए रखनी होगी।
H3: ध्यान से सुनना और सहायता प्रदान करना
विधायकों एवं सांसदों से मिलने के दौरान उनकी बातों को ध्यान से सुनना और नियमों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।
H3: फोन पर भी विनम्र भाषा का प्रयोग
फोन कॉल पर भी अधिकारियों को विनम्र और सम्मानजनक भाषा का उपयोग करना अनिवार्य होगा।
H2: परिपत्र जारी करने का कारण
यह नया जीआर कई पुराने परिपत्रों को एक साथ लाकर अपडेट करता है।
हाल ही में सत्तारूढ़ दलों सहित कई विधायकों और सांसदों ने शिकायत की थी कि अधिकारी:
- मिलने के लिए समय नहीं देते
- उनकी समस्याएँ नहीं सुनते
- फाइलों पर आवश्यक कार्रवाई तेजी से नहीं करते
इसी के बाद सरकार ने यह कदम उठाया।
H2: नियमों का पालन न करने वालों पर होगी कार्रवाई
जीआर में यह भी तय किया गया है कि:
- निर्देशों का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी
- सरकार सुशासन, पारदर्शिता और दक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है
- जनप्रतिनिधियों को सम्मान देना प्रशासन की विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण हिस्सा है
मुख्य सचिव राजेश कुमार ने साफ कहा है कि इन नियमों का उद्देश्य प्रशासन को अधिक जवाबदेह और संवेदनशील बनाना है।

