भारत-अमेरिका रक्षा करार: 93 करोड़ डॉलर के हथियार सौदे को मंजूरी, जैवलिन मिसाइल और एक्सकैलिबर राउंड्स की जल्द डिलीवरी

Thecity news
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अमेरिका ने बुधवार को भारत के साथ 93 करोड़ डॉलर (करीब 824 करोड़ रुपये) के दो प्रमुख हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी। इससे भारत को जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइलों और एक्सकैलिबर प्रिसिजन-गाइडेड आर्टिलरी राउंड्स की नई खेप जल्द मिलने का रास्ता साफ हो गया।
अमेरिकी डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है।


🔹 सौदे में क्या शामिल है?

DSCA के मुताबिक, अमेरिकी विदेश विभाग ने 47.1 करोड़ डॉलर (करीब 405 करोड़ रुपये) की अनुमानित लागत से जैवलिन मिसाइल सिस्टम की संभावित बिक्री को मंजूरी दी है। भारत ने अमेरिका से यह उपकरण मांगे थे:

  • 100 FGM-148 जैवलिन मिसाइल राउंड्स
  • 1 FGM-148 मिसाइल (फ्लाई-टू-बाय)
  • 25 कमांड लॉन्च यूनिट (CLU)
  • मिसाइल सिमुलेशन राउंड
  • स्पेयर पार्ट्स और लाइफसाइकल सपोर्ट

अमेरिका ने इस प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस को औपचारिक रूप से सूचित कर दिया है।


🔹 जैवलिन मिसाइल कितनी खास?

  • तीसरी पीढ़ी की टॉप-अटैक एंटी-टैंक मिसाइल
  • यूक्रेन युद्ध में रूसी T-72 और T-90 टैंकों को ध्वस्त करने में साबित क्षमता
  • कंधे से दागी जाने वाली प्रणाली
  • सॉफ्ट-लॉन्च तकनीक से बंकर जैसे बंद स्थानों से भी लॉन्च संभव
  • कई देशों की सेनाओं में पहले से तैनात

🔹 सैन्य संतुलन पर असर नहीं पड़ेगा — DSCA

DSCA ने कहा कि इस प्रस्तावित हथियार बिक्री से क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इन अत्याधुनिक हथियारों की आपूर्ति से भारत की प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता बढ़ेगी और भविष्य के खतरों से निपटने में मदद मिलेगी।
अमेरिकी सरकार ने बताया कि सौदे से जुड़े किसी ऑफसेट समझौते की जानकारी नहीं है।


🔹 भारत की अतिरिक्त तकनीकी और सेवा मांगें

भारत ने हथियारों की आपूर्ति के साथ अतिरिक्त सेवाओं की भी मांग की है, जिनमें शामिल हैं—

  • लाइफसाइकल सपोर्ट
  • सुरक्षा निरीक्षण
  • तकनीकी/ऑपरेटर स्टाफ ट्रेनिंग
  • लॉन्च सिस्टम की रिफर्बिशमेंट
  • ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने के लिए तकनीकी सहायता

155mm एक्सकैलिबर GPS-गाइडेड राउंड्स लंबी दूरी पर भी बेहद सटीकता प्रदान करते हैं, और पहाड़ी, सीमावर्ती और शहरी इलाकों में अत्यधिक प्रभावी माने जाते हैं।

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