आजादी के 79 साल में बदली महिलाओं की शिक्षा की तस्वीर, साक्षरता से उच्च शिक्षा तक बढ़ी भागीदारी

Thecity news
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भारत 15 अगस्त 2026 को अपनी स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ मनाएगा। यानी आजाद भारत अपने 79 साल पूरे कर चुका है। इन 79 वर्षों में देश के कई क्षेत्रों में व्यापक बदलाव हुए हैं, जिनमें महिला सशक्तिकरण सबसे अहम रहा है। आजादी के बाद महिलाओं की शिक्षा में सुधार को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। आजादी के वक्त भारत की करीब 91 फीसदी महिलाएं निरक्षर थीं, लेकिन अब तस्वीर काफी बदल चुकी है। मौजूदा समय में भारत की शिक्षा व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आइए आजाद भारत में महिलाओं की शिक्षा यात्रा पर एक नजर डालते हैं और जानते हैं कि आजादी के वक्त महिलाओं की साक्षरता दर क्या थी और मौजूदा समय में उच्च शिक्षा में उनकी स्थिति कैसी है।

महिला साक्षरता दर में 65 फीसदी से अधिक सुधार

भारत में महिलाओं की शिक्षा की स्थिति में पिछले सात दशकों में व्यापक सुधार हुआ है। 1951-52 में हुई पहली जनगणना में भारत की कुल साक्षरता दर 12 फीसदी दर्ज की गई थी। इसमें महिला साक्षरता दर करीब 9 फीसदी थी।

वहीं, 2011 की जनगणना में भारत में महिलाओं की साक्षरता दर बढ़कर 65.46 फीसदी दर्ज की गई। इसके बाद हुए कुछ सर्वेक्षणों में देश में महिला साक्षरता दर करीब 74.6 फीसदी दर्ज की गई है। इस हिसाब से देखें तो आजाद भारत में महिला साक्षरता दर में 65 फीसदी से अधिक का सुधार हुआ है।

उच्च शिक्षा में रिकॉर्ड संख्या में लड़कियों का नामांकन

भारत में महिलाओं की शैक्षणिक स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। इसका उदाहरण केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड समेत दूसरे बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में भी देखने को मिलता है, जहां कई बार लड़कियों का पास प्रतिशत लड़कों से बेहतर रहता है। यही वजह है कि देश की उच्च शिक्षा में लड़कियों के नामांकन में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन की 2022-23 और 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों में 2014-15 में 1.57 करोड़ लड़कियां पंजीकृत थीं। यह संख्या 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गई। यानी इस अवधि में लड़कियों के नामांकन में करीब 42.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

STEM में भी बढ़ा लड़कियों का इंटरेस्ट

ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन की रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित यानी एसटीईएम विषयों में भी लड़कियों की रुचि बढ़ी है।

इन विषयों में कुल नामांकन 2014-15 के 91.5 लाख से बढ़कर 2023-24 में 1.02 करोड़ हो गया। वहीं एसटीईएम में छात्राओं की हिस्सेदारी भी 38.4 फीसदी से बढ़कर 44 फीसदी हो गई है।

कोठारी आयोग की सिफारिशों के अनुरूप 1970 के दशक में महिलाओं को समान रूप से गणित और विज्ञान पढ़ाने की दिशा में कदम उठाए गए थे। आज इन क्षेत्रों में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी इसी लंबे बदलाव की तस्वीर पेश करती है।

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