जुहू बीच पर ज्वार के बाद कचरे का अंबार, प्लास्टिक प्रदूषण ने बढ़ाई पर्यावरण और स्वास्थ्य की चिंता

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मानसून में अरब सागर से बहकर आया प्लास्टिक और मलबा, विशेषज्ञों ने कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर उठाए सवाल

मुंबई के जुहू बीच पर मानसून के दौरान आए तेज ज्वार के बाद बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा, थर्माकोल, बोतलें और घरेलू मलबा बहकर पहुंच गया, जिससे पूरा समुद्र तट कचरे से पट गया। कई हिस्सों में सीवेजयुक्त पानी फैलने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसे समुद्री प्रदूषण और कचरा प्रबंधन की गंभीर समस्या बताया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान नदियों, नालों और सीवर के जरिए भारी मात्रा में प्लास्टिक और अन्य कचरा अरब सागर में पहुंच जाता है। तेज ज्वार आने पर यही कचरा वापस समुद्र तट पर आ जाता है। उनका कहना है कि यह स्थिति शहर की ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था की कमियों को उजागर करती है।

पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि समुद्र में मौजूद प्लास्टिक समुद्री जीवों और पक्षियों के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। कई बार समुद्री जीव प्लास्टिक को भोजन समझकर निगल लेते हैं, जिससे उनकी मौत तक हो जाती है। इसके अलावा प्रदूषित पानी तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा रहा है और बीच पर आने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डाल सकता है।

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन कुछ समय के लिए जुहू बीच पर लोगों की आवाजाही रोक दी। सुरक्षा के मद्देनजर बीच पर लाइफगार्ड और पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

पर्यावरण विशेषज्ञों ने समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कचरा प्रबंधन को मजबूत करने, नालों के जरिए समुद्र में कचरा जाने से रोकने, नियमित सफाई अभियान चलाने और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि दीर्घकालिक और प्रभावी प्रयासों के बिना जुहू बीच को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखना संभव नहीं होगा।

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