महाराष्ट्र निकाय चुनावों पर कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गंभीर आरोप लगाए। सालेकसा नगर पंचायत में 17 EVM की सील तोड़कर दोबारा वोटिंग कराने का दावा, FIR तक न दर्ज होने पर नाराजगी। तहसीलदार को हटाया गया।
Maharashtra Nikay Chunav: कांग्रेस ने लगाया गंभीर आरोप
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने हाल ही में संपन्न हुए नगरपालिका चुनावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सपकाल ने कहा कि इन चुनावों में “लोकतंत्र का चीर-हरण” किया गया और चुनाव प्रक्रिया का खुला मजाक उड़ाया गया।
उन्होंने बताया कि गोंदिया जिले की सालेकसा नगर पंचायत में मतदान खत्म होने के बाद 17 EVM मशीनों की सील तोड़कर दोबारा वोटिंग कराई गई, जो चौंकाने वाला मामला है। इसके बावजूद अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद हुए चुनाव, पर प्रक्रिया पर सवाल
10 साल बाद महाराष्ट्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत स्थानीय निकाय चुनाव कराए जा रहे हैं। लेकिन सपकाल का आरोप है कि:
- सत्ताधारी पक्ष
- प्रशासन
- और चुनाव आयोग
ने मिलकर चुनाव प्रक्रिया को दूषित किया और बोगस वोटिंग, दबाव, और नियमों की अनदेखी के चलते लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया।
कांग्रेस की मांग — चुनाव प्रक्रिया में सुधार
सपकाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर लगातार आवाज उठा रही है:
- मतदाता सूची में बार-बार गड़बड़ी
- वोट चोरी
- EVM से छेड़छाड़ का खतरा
उन्होंने चुनाव आयोग से “आंखें खोलने” और तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की।
सपकाल ने यह भी कहा कि देश को टीएन शेषन जैसे कड़े चुनाव अधिकारी की आवश्यकता है, जो धांधली रोक सके।
सालेकसा मामला: तहसीलदार पर गिरी गाज
सालेकसा में मतपेटियों की सील तोड़े जाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है।
- तहसीलदार मोनिका कांबले को निर्वाचन निर्णय अधिकारी पद से हटाया गया है।
- उनकी जगह अर्जुनी मोरगाव के तहसीलदार अनिरुद्ध कांबले को नियुक्त किया गया है।
14 दिसंबर को कांग्रेस की देशव्यापी रैली
सपकाल ने बताया कि EVM हैकिंग, वोट चोरी और चुनावी धांधली के मुद्दों को लेकर कांग्रेस 14 दिसंबर को दिल्ली में देशव्यापी रैली आयोजित करेगी।
इसके साथ ही उन्होंने भाजपा सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया।
उनका कहना है कि मई से अक्टूबर के बीच भारी बारिश ने किसानों की फसलें बर्बाद कर दीं, लेकिन उन्हें अभी भी उचित मुआवजा नहीं मिला है।

