महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों पारिवारिक मनोमिलन का मौसम जोर पकड़ता नजर आ रहा है। पहले उद्धव ठाकरे–राज ठाकरे और फिर शरद पवार–अजित पवार के साथ आने के बाद अब आंबेडकर बंधुओं के बीच भी मतभेद कम होने के संकेत मिलने लगे हैं।
नव वर्ष की पूर्व संध्या पर आनंदराज आंबेडकर के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि महानगरपालिका चुनावों के मद्देनजर भविष्य में दोनों भाई एकजुट हो सकते हैं।
🗣️ आनंदराज आंबेडकर का बड़ा बयान
आनंदराज आंबेडकर ने कहा कि
“आंबेडकरी आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य में हम दोनों भाई भी एकजुट हो सकते हैं।”
उन्होंने ठाकरे बंधुओं का उदाहरण देते हुए कहा कि हर चीज का एक समय होता है।
“जैसे ठाकरे बंधु एकजुट हुए, वैसे ही भविष्य में हम भी हो सकते हैं। यदि प्रयास हुआ तो मेरी तरफ से सकारात्मक प्रतिसाद रहेगा।”
❌ उद्धव-राज गठबंधन पर सवाल
ठाकरे बंधुओं के एकजुट होने पर आनंदराज आंबेडकर ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि मुंबई में इससे कोई बड़ा चमत्कार नहीं होगा।
उनका आरोप था कि
- पिछले 25 वर्षों के शासन में मराठी लोग पलायन को मजबूर हुए
- इस गठबंधन से केवल अंधभक्त प्रभावित होंगे
- धर्म या जाति के नाम पर राजनीति से समस्याओं का समाधान नहीं होगा
उन्होंने यह भी कहा कि योग्य व्यक्ति को महापौर बनाने की बात कोई नहीं कर रहा है।
⚠️ शिंदे गुट से गठबंधन पर नाराजगी
आनंदराज आंबेडकर ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ मौजूदा गठबंधन पर भी असंतोष जाहिर किया।
उन्होंने कहा कि
- मांगी गई महत्वपूर्ण सीटें नहीं दी गईं
- कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है
साथ ही उन्होंने रामदास आठवले को नसीहत देते हुए कहा कि
“सिर्फ सत्ता में बैठकर राजनीति नहीं चलती।”
🔍 राजनीतिक संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,
- यदि आंबेडकर बंधु एकजुट होते हैं
- तो शहरी दलित वोट बैंक पर इसका सीधा असर पड़ सकता है
- आगामी नगरपालिका और स्थानीय निकाय चुनावों में समीकरण बदल सकते हैं

