संसद सत्र के बीच राहुल गांधी जाएंगे जर्मनी, BJP बोली – ‘वो विपक्ष नहीं पर्यटन के नेता’

Thecity news
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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक बार फिर अपनी विदेश यात्रा को लेकर सुर्खियों में हैं। संसद के शीतकालीन सत्र के बीच राहुल गांधी जर्मनी जाने वाले हैं।
उनकी इस विदेश यात्रा को लेकर भाजपा ने सवाल खड़े किए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि राहुल के लिए ‘LoP’ का मतलब ‘लीडर ऑफ टूरिज्म’ हो गया है।

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला, सांसद कंगना रनोट और संजय जायसवाल ने इस मुद्दे पर राहुल को घेरा है।


पूनावाला बोले – राहुल भारत को बदनाम करने जा रहे

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा:

“राहुल गांधी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ‘LoP’ का मतलब ‘लीडर ऑफ पर्यटन’ है। लोग वर्क मोड में हैं, राहुल गांधी वैकेशन मोड में हैं। हो सकता है वो भारत के खिलाफ जहर उगलने जा रहे हों।”

उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेश जाकर भारत की छवि खराब करने की कोशिश करते हैं।


प्रह्लाद जोशी बोले – राहुल गांधी ‘पार्ट-टाइम’ नेता

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि राहुल गांधी संसद सत्र के दौरान अधिकतर विदेश में रहते हैं।
उन्होंने तंज किया:

“राहुल गांधी गंभीर नेता नहीं हैं। वो पार्ट-टाइम राजनीति करते हैं।”

जोशी ने कहा कि कांग्रेस जब चुनाव हारती है तो चुनाव आयोग और EVM को दोष देती है।


प्रियंका गांधी का पलटवार – प्रधानमंत्री आधा समय विदेश में रहते हैं

राहुल पर लगातार हो रहे हमलों के बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भाजपा पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा:

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कार्यकाल का आधा समय विदेश में बिताते हैं। तब भाजपा सवाल क्यों नहीं उठाती?”

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की विदेश यात्रा सामान्य है और इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।


17 दिसंबर को बर्लिन कार्यक्रम में शामिल होंगे राहुल

राहुल गांधी 17 दिसंबर 2025 को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में इंडियन ओवरसीज कांग्रेस (IOC) के कार्यक्रम में शामिल होंगे।
IOC ऑस्ट्रिया के अध्यक्ष ऑसफ खान ने कहा कि राहुल भारतीय प्रवासी समुदाय से संवाद करेंगे और यूरोप के IOC नेताओं से कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे।


राहुल गांधी के विदेश दौरे क्यों विवादित रहते हैं?

राहुल गांधी अकसर विदेश दौरों पर जाते रहते हैं, जहाँ वे विश्वविद्यालयों और संस्थानों को संबोधित करते हैं।
उनके कई भाषणों में भारत के लोकतंत्र और सरकारी संस्थानों पर किए गए बयान विवादों का कारण बने हैं।

सितंबर में उनके ब्राजील, कोलंबिया, पेरू और चिली दौरे के दौरान भी ऐसा ही हुआ था।

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