भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। कमजोर वैश्विक संकेतों और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बीच घरेलू बाजार में शुरुआती कारोबार से ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला। BSE Sensex और Nifty 50 दोनों प्रमुख सूचकांकों ने गिरावट के साथ दिन की शुरुआत की, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
सेंसेक्स 322 अंक गिरकर खुला
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 322 अंकों की गिरावट के साथ 73,945 के स्तर पर खुला। बाजार खुलते ही अधिकांश सेक्टर्स में बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई।
लगातार गिरावट के चलते बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं।
निफ्टी भी 23,250 के नीचे फिसला
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 शुरुआती कारोबार में 153 अंक टूटकर 23,229 के स्तर पर खुला।
विश्लेषकों का मानना है कि कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की सतर्कता का असर भारतीय बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। वहीं गिफ्ट निफ्टी भी कमजोर संकेत दे रहा था, जिससे बाजार की नकारात्मक शुरुआत की संभावना पहले ही जताई जा रही थी।
एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव
भारतीय बाजारों के साथ-साथ एशियाई शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली।
प्रमुख एशियाई सूचकांकों का हाल
- Nikkei 225 : 0.52% की गिरावट
- TOPIX : 0.98% नीचे
- KOSPI : 0.32% कमजोर
- KOSDAQ : 2.5% तक लुढ़का
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है।
सेंसेक्स और निफ्टी के लिए अहम स्तर
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक आज का कारोबार तकनीकी रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सेंसेक्स के लिए प्रमुख स्तर
- 74,500 के ऊपर जाने पर 75,000 तक तकनीकी उछाल संभव
- 74,500 के नीचे बने रहने पर 73,700 तक गिरावट की आशंका
निफ्टी के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस
- 23,690 के आसपास मजबूत रेजिस्टेंस
- 23,262 तत्काल सपोर्ट स्तर
- इसके नीचे बंद होने पर 23,150 तक फिसलने की संभावना
विश्लेषकों का मानना है कि इन स्तरों पर बाजार की दिशा तय हो सकती है।
कच्चे तेल और वैश्विक तनाव का असर
वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता का असर कमोडिटी बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर तनाव बढ़ने की आशंकाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती बनी हुई है।
ऊंचे तेल दाम भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय माने जाते हैं क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।
राजकोषीय घाटे के आंकड़ों ने भी बढ़ाई चिंता
बाजार पर घरेलू आर्थिक आंकड़ों का भी असर दिखाई दे रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार देश का राजकोषीय घाटा बढ़कर 3.62 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। निवेशक अब आने वाले आर्थिक संकेतकों और सरकार की वित्तीय रणनीतियों पर नजर बनाए हुए हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को घबराहट में निर्णय लेने से बचना चाहिए। बाजार की दिशा वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेश प्रवाह और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से प्रभावित हो सकती है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों को गुणवत्ता वाले शेयरों पर ध्यान केंद्रित करने और जोखिम प्रबंधन की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

