बीहड़ कानून विवाद में, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पश्चिम बंगाल की सुनाली खातून और उसके 8 साल के बेटे को बांग्लादेश से भारत वापस लाया गया। पढ़ें पूरी कहानी और सुप्रीम कोर्ट का आदेश।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सुनाली खातून और बेटे को भारत वापस लाया गया
पश्चिम बंगाल के बीरभूम की रहने वाली सुनाली खातून और उनके 8 साल के बेटे साबिर को बांग्लादेश से दोबारा भारत लाया गया है। पांच महीने पहले उन्हें अवैध प्रवासी बताकर परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भारत से बांग्लादेश निर्वासित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, गर्भवती सुनाली को मालदा सीमा के रास्ते भारत लाया गया।
सुनाली खातून कौन हैं?
- सुनाली और उनका परिवार बीहड़म के पैकर गांव का रहने वाला है।
- यह परिवार करीब 20 साल से दिल्ली की झुग्गियों में कचरा बीनने का काम कर रहा था।
- 18 जून को दिल्ली के काटजू नगर थाना इलाके की पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। पुलिस का शक था कि वे बांग्लादेशी घुसपैठिया हैं।
बांग्लादेश में निर्वासन
- 27 जून को सुनाली, उनके पति दानिश और बेटे को बांग्लादेश भेज दिया गया।
- उनके साथ एक और परिवार भी निर्वासित किया गया।
- 20 अगस्त से सभी को चपाई नवाबगंज जेल में रखा गया।
- 1 दिसंबर को स्थानीय कोर्ट ने 5,000 टका के मुचलके पर जमानत दे दी।
सुप्रीम कोर्ट में मामला
- सुनाली के पिता भोदू शेख ने दावा किया कि उनका परिवार 20 साल से भारत में रह रहा है और सभी के पास नागरिकता है।
- इस आधार पर कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।
- हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को परिवार को भारत वापस लाने का आदेश दिया।
- केंद्र सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार
- कोर्ट ने कहा कि अवांधिप्रवासी को बिना उचित प्रक्रिया के निर्वासित नहीं किया जा सकता।
- पुलिस के दावे गलत साबित हुए।
- कोर्ट ने कहा: “अगर कोई कहता है कि वह भारत में पैदा हुआ और बड़ा हुआ है, तो उसके अधिकार हैं। उनकी बात सुनी जानी चाहिए।”
- कोर्ट ने सुनाली और बेटे को भारत लाने का आदेश दिया।
सुनाली का बयान
- 5 दिसंबर की शाम सुनाली और उनके बेटे को महादीपुर सीमा चौकी के जरिए भारत में सौंपा गया।
- मेडिकल जांच के बाद उन्हें अपने गांव जाने की अनुमति दी जा सकती है।
- सुनाली ने कहा: “मैं भारत लौटकर बहुत खुश हूं। मैं चाहती हूं कि मेरे पति भी भारत आ जाए।”
- तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे गरीब परिवार के लिए बड़ी जीत बताया।

