
नई दिल्ली: देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के काटने के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा आदेश पारित किया है।
कोर्ट ने कहा कि अब हर शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, खेल परिसर, बस स्टैंड, डिपो और रेलवे स्टेशन परिसर में से आवारा कुत्तों को हटाया जाए और उनका प्रवेश पूरी तरह रोका जाए।
🧱 कोर्ट का आदेश — परिसर में बाड़ लगाकर रोकें प्रवेश
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि इन परिसरों में कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए उचित बाड़ (fencing) और सुरक्षा उपाय किए जाएं।
पीठ ने यह आदेश आवारा कुत्तों के मामले में स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए दिया।
🏛️ स्थानीय निकायों को मिली जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय स्वशासी संस्थाओं (local bodies) को निर्देश दिया है कि वे समय-समय पर निरीक्षण करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी सार्वजनिक स्थल पर कुत्तों का निवास स्थान न बन पाए।
कोर्ट ने आदेश दिया कि उठाए गए कुत्तों को टीकाकरण और नसबंदी के बाद पशु आश्रयों में भेजा जाए।
🚫 राष्ट्रीय राजमार्गों से भी हटेंगे पशु
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे आवारा कुत्तों या पशुओं को वापस उसी इलाके में नहीं छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें उठाया गया था, क्योंकि इससे आदेश का उद्देश्य प्रभावित होगा।
इसके साथ ही कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़कों से आवारा पशुओं और जानवरों को हटाने के निर्देश भी जारी किए हैं।
📅 मामला कैसे शुरू हुआ?
28 जुलाई को न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया था।
11 अगस्त को दिल्ली नगर निगम को आदेश दिया गया था कि सभी आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों पर स्थानांतरित किया जाए।
बाद में 13 अगस्त को मामला न्यायमूर्ति नाथ की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ को सौंपा गया, जिसने 22 अगस्त को पहले आदेश में संशोधन किया।
🐕 पिछले आदेश में था नरमी का रुख
22 अगस्त के आदेश में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि रेबीज संक्रमित कुत्तों को छोड़कर अन्य को नसबंदी के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है।
हालांकि, अब नई पीठ ने इस आदेश को बहुत कठोर और अप्रभावी बताते हुए संशोधित किया है।
📝 कोर्ट ने क्या कहा?
“सार्वजनिक स्थलों, शैक्षणिक परिसरों और अस्पतालों में आवारा कुत्तों की उपस्थिति नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। स्थानीय प्रशासन को इसे सख्ती से नियंत्रित करना चाहिए।”
— सुप्रीम कोर्ट पीठ, नई दिल्ली
📣 राज्य सरकारों से मांगा हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों से हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह बताया जाए कि आवारा कुत्तों और पशुओं के नियंत्रण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

