भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। सेंसेक्स 533 अंक टूटकर 75,044 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 135 अंक फिसलकर 23,498 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव IT और सर्विसेज सेक्टर के शेयरों में बिकवाली से बना।
IT और सर्विसेज शेयरों ने बढ़ाया दबाव
शुरुआती कारोबार में IT और सर्विसेज सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। सेक्टोरल सूचकांकों में निफ्टी IT और निफ्टी सर्विसेज सबसे बड़े नुकसान वाले इंडेक्स रहे।
इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, रियल्टी, ऑटो, PSU बैंक, प्राइवेट बैंक, FMCG, मीडिया, कंजम्पशन, ऑयल एंड गैस और इंडिया मैन्युफैक्चरिंग सूचकांक भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। इससे बाजार में व्यापक कमजोरी नजर आई।
फार्मा, मेटल और एनर्जी शेयरों में खरीदारी
दूसरी ओर, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी PSE, निफ्टी फार्मा, निफ्टी मेटल और निफ्टी कमोडिटीज हरे निशान में कारोबार करते दिखे।
सेंसेक्स पैक में L&T, NTPC, सन फार्मा, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, BEL, अदाणी पोर्ट्स और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर बढ़त में रहे।
इन दिग्गज शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
शुरुआती कारोबार में HCL टेक, टेक महिंद्रा, इंफोसिस और TCS IT सेक्टर के प्रमुख लूजर्स रहे। इनके अलावा HUL, M&M, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, HDFC बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, ICICI बैंक, इटरनल, SBI, एक्सिस बैंक, ITC, टाइटन, मारुति सुजुकी और एशियन पेंट्स के शेयर भी गिरावट में कारोबार करते दिखे।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
एशियाई शेयर बाजारों में बुधवार को मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक और सोल के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में रहे, जबकि जकार्ता का बाजार लाल निशान में कारोबार करता दिखा।
अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद
अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को कमजोरी के साथ बंद हुए। डाउ जोंस में 1.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक 0.32 प्रतिशत टूटकर बंद हुआ।
कच्चे तेल और IPO लिक्विडिटी से दबाव
जानकारों के मुताबिक, इस समय बाजार पर दो बड़ी चुनौतियों का असर दिखाई दे रहा है। पहली चुनौती अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
दूसरी चुनौती तेजी से बढ़ता IPO बाजार है। जानकारों के अनुसार, IPO में बढ़ती गतिविधियों के कारण शेयर बाजार से लिक्विडिटी कम हो रही है और इसका असर निफ्टी पर पड़ रहा है। उनका मानना है कि फिलहाल दूसरी वजह का असर पहली वजह से ज्यादा हो सकता है।
IPO में बढ़ रही निवेशकों की दिलचस्पी
विशेषज्ञों के मुताबिक, जून के बाद से IPO का औसत लिस्टिंग गेन बढ़कर करीब 22 प्रतिशत हो गया है। इसके चलते रिटेल और इंस्टीट्यूशनल दोनों तरह के निवेशकों की IPO बाजार में दिलचस्पी बढ़ी है।
विशेषज्ञों ने बताया कि इस साल अब तक निफ्टी का रिटर्न -9.5 प्रतिशत रहा है। वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने एक्सचेंजों के जरिए करीब 2.84 लाख करोड़ रुपये की इक्विटी बेची है। इसके बावजूद FII ने IPO में लगभग 36,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

