शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट, सेंसेक्स 27 अंक टूटा; निफ्टी 23,444 पर खुला

Thecity news
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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू बाजार में दबाव जारी, एशियाई बाजारों में भी गिरावट

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 10 सितंबर को लगातार चौथे दिन दबाव देखने को मिला। बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 27 अंक गिरकर 74,742 के स्तर पर खुला। वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला निफ्टी 15 अंक की बढ़त के साथ 23,444 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत की।

इससे पहले बुधवार, 9 सितंबर को भी भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक मुद्रास्फीति को लेकर नए सिरे से चिंता बढ़ी, जिसका असर निवेशकों की धारणा पर पड़ा। निफ्टी 0.86 प्रतिशत गिरकर 23,431 के तीन महीने के निचले स्तर पर बंद हुआ था। सेंसेक्स भी 1.08 प्रतिशत टूटकर 74,764 के स्तर पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी ने दिए कमजोर शुरुआत के संकेत

गिफ्ट निफ्टी 23,461.50 के आसपास कारोबार कर रहा था। यह निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद स्तर से करीब 90.70 अंक नीचे था। इससे भारतीय शेयर बाजार में कमजोर शुरुआत के संकेत मिले।

एशियाई बाजारों में भी दबाव

एशियाई बाजारों में गुरुवार को व्यापक गिरावट देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 96.61 अंक यानी 1.37 प्रतिशत गिरकर 6,955.03 पर आ गया।

जापान के निक्केई 225 में 1.07 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि टॉपिक्स 0.53 प्रतिशत फिसल गया। ताइवान के शेयर बाजार में भी शुरुआती कारोबार के दौरान बिकवाली का दबाव रहा और सूचकांक 378 अंक गिरकर 46,805.36 के स्तर पर पहुंच गया, जो 47,000 के स्तर से नीचे है।

वॉल स्ट्रीट पर भी बिकवाली

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने अमेरिकी बाजार के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज करीब 400 अंक और गिरा। इसके साथ तीन कारोबारी दिनों में डॉव की कुल गिरावट करीब 1,300 अंक हो गई।

एसएंडपी 500 में 0.6 प्रतिशत और नैस्डैक कंपोजिट में 0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

100 डॉलर के पार ब्रेंट क्रूड

ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध तेज होने की चिंताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी है। गुरुवार सुबह इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 101.42 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं, डब्ल्यूटीआई 62 सेंट की बढ़त के साथ 96.67 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी वैश्विक महंगाई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है, जिसका असर शेयर बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है।

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