जंगल सफारी में वैभव सूर्यवंशी को नहीं दिखा बाघ, अब लाल गेंद से बड़ी चुनौती की तैयारी

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वर्धा के बोर टाइगर रिजर्व में 4 घंटे सफारी के बाद दलीप ट्रॉफी की तैयारी में जुटे वैभव, पहली बार ईस्ट जोन के उप-कप्तान बने

युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी इन दिनों क्रिकेट के मैदान के साथ-साथ जंगल के रोमांच का भी लुत्फ उठाते नजर आए। आगामी घरेलू सीजन और दलीप ट्रॉफी 2026 की तैयारियों के बीच वैभव महाराष्ट्र के वर्धा जिले में स्थित बोर टाइगर रिजर्व पहुंचे, जहां उन्होंने करीब 4 घंटे तक जंगल सफारी की। इस दौरान उनके साथ राजस्थान रॉयल्स के कोच कुमार संगकारा और फॉरेस्ट इंस्पेक्टर रूपेश खेडकर भी मौजूद रहे।

बाघ देखने से चूक गए

सफारी के दौरान वैभव को तेंदुआ, भालू, सांभर, चीतल और मोर समेत कई वन्यजीव देखने को मिले। उन्होंने इस खास सफारी का वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किया, जिसे फैंस काफी पसंद कर रहे हैं।

हालांकि, पूरे सफारी के दौरान उनकी नजरें जंगल के राजा यानी बाघ की एक झलक पाने पर टिकी रहीं। बताया जा रहा है कि वैभव बेहद मामूली अंतर से बाघ को देखने से चूक गए।

मैदान पर बड़ी चुनौती की तैयारी

जंगल में बाघ की तलाश के बाद वैभव अब क्रिकेट के मैदान पर अपनी अगली बड़ी चुनौती की तैयारी में जुट गए हैं। वह महाराष्ट्र के तालेगांव स्थित राजस्थान रॉयल्स की एकेडमी में लाल गेंद से कड़ा अभ्यास कर रहे हैं।

यहां 10 दिन का विशेष प्री-सीजन ट्रेनिंग कैंप चल रहा है, जहां टीम के सीनियर बैटिंग कोच विक्रम राठौड़ की निगरानी में वैभव अपनी बल्लेबाजी तकनीक को मजबूत कर रहे हैं।

लाल गेंद के खिलाफ बेहतर बल्लेबाजी पर जोर

टी-20 और सीमित ओवरों के क्रिकेट में अपने आक्रामक अंदाज के लिए पहचान बना चुके वैभव अब खुद को टेस्ट और प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लिए तैयार कर रहे हैं। वह लंबे समय तक क्रीज पर टिकने और लाल गेंद के खिलाफ बेहतर बल्लेबाजी करने पर खास ध्यान दे रहे हैं।

दलीप ट्रॉफी में मिली बड़ी जिम्मेदारी

वैभव के लिए यह ट्रेनिंग इसलिए भी अहम है क्योंकि वह दलीप ट्रॉफी 2026 में पहली बार ईस्ट जोन की टीम का हिस्सा होंगे। इतना ही नहीं, चयनकर्ताओं ने उन्हें टीम का उप-कप्तान भी बनाया है।

इतनी कम उम्र में मिली यह जिम्मेदारी उनके लिए बड़ा मौका होने के साथ-साथ खुद को साबित करने की चुनौती भी है। अब उनकी कोशिश दलीप ट्रॉफी में बल्ले से दमदार प्रदर्शन कर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपनी पहचान मजबूत करने की होगी।

जंगल में बाघ की तलाश के बाद अब वैभव की नजर क्रिकेट के मैदान पर बड़ी कामयाबी हासिल करने पर है। लाल गेंद के खिलाफ उनका प्रदर्शन यह तय करने में अहम होगा कि वह लंबे प्रारूप के क्रिकेट में खुद को कितनी जल्दी ढाल पाते हैं।

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