चीनी की कीमतों में पिछले तीन महीनों में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सरकार ने साफ किया है कि महंगी चीनी के लिए एथेनॉल उत्पादन जिम्मेदार नहीं है। कम उत्पादन, गन्ने की फसल को नुकसान और मांग में बढ़ोतरी को कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह बताया गया है।
देश में त्योहारी सीजन से ठीक पहले चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पिछले तीन महीनों के भीतर चीनी के भाव में करीब 40 फीसदी यानी 19 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है। इस बीच शुक्रवार को सरकार की ओर से चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि चीनी की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह एथेनॉल उत्पादन नहीं है, बल्कि उत्पादन में कमी और मांग में बढ़ोतरी समेत कई अन्य कारण हैं।
क्या एथेनॉल के कारण महंगी हुई चीनी?
चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार की आलोचना भी हो रही है। कुछ लोगों की ओर से दावा किया जा रहा था कि एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी को डायवर्ट किए जाने के कारण देश में चीनी की उपलब्धता कम हुई और इसके चलते कीमतों में तेजी आई। सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि मौजूदा तेजी को एथेनॉल उत्पादन से जोड़ना सही नहीं है।
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई को चीनी का भाव 48।18 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो 20 अगस्त को बढ़कर 55।70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। यानी एक महीने के भीतर ही चीनी की कीमत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
महंगी चीनी के लिए एथेनॉल जिम्मेदार नहीं
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने एथेनॉल को लेकर चल रही चर्चा पर स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय के अनुसार, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को एथेनॉल उत्पादन से जोड़ना सही नहीं है। सरकार ने बताया कि एथेनॉल के लिए चीनी डायवर्ट करने की हिस्सेदारी वास्तव में कम हुई है।
साल 2022-23 में चीनी को एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट करने की हिस्सेदारी करीब 12 फीसदी थी, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 फीसदी रह गई है। वहीं, देश में उत्पादित एथेनॉल का करीब तीन चौथाई हिस्सा अब अनाज से आता है। इसमें मक्का जैसे अनाज प्रमुख हैं। ऐसे में सरकार का कहना है कि मौजूदा समय में चीनी की कीमत बढ़ने की वजह एथेनॉल नहीं है।
306 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान
सरकार के मुताबिक, मौजूदा सीजन में करीब 306 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। शुरुआत में करीब 343 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। गन्ने की फसल में बीमारी और ज्यादा बारिश के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है।
इस सीजन में कई क्षेत्रों में गन्ने की फसल पर रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों का असर देखने को मिला। इसके अलावा कई इलाकों में अनुमान से ज्यादा बारिश होने के कारण जलभराव की स्थिति बनी, जिससे गन्ने के उत्पादन में कमी आई।
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में घरेलू जरूरत के हिसाब से पर्याप्त चीनी का स्टॉक मौजूद है। यह स्टॉक अक्टूबर में नए पेराई सीजन की शुरुआत होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त बताया गया है।
दुनियाभर में भी बढ़ रही चीनी की कीमत
चीनी की कीमतों में तेजी केवल भारत तक सीमित नहीं है। वैश्विक बाजार में भी चीनी की आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। अनुमान के मुताबिक, 2026-27 में दुनियाभर में चीनी की कमी करीब 33 लाख टन रह सकती है। मौसम को लेकर बनी चिंताओं ने भी वैश्विक चीनी बाजार को प्रभावित किया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी के दाम में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 30 जून को चीनी की अंतरराष्ट्रीय कीमत 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त को बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई। इस तरह करीब दो महीनों में अंतरराष्ट्रीय कीमत में 16 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

