
भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरा लोकसभा सीट से पूर्व सांसद आरके सिंह को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया है। उन पर पार्टी-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। भाजपा ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर कड़ा रुख अपनाया है।
पार्टी के नोटिस में क्या लिखा था?

भाजपा की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में कहा गया कि उनकी गतिविधियां पार्टी अनुशासन के खिलाफ हैं और इससे संगठन को नुकसान हुआ है। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि उन्हें निलंबित किया जा रहा है और उनसे पूछा गया कि क्यों न उन्हें पूरी तरह से पार्टी से निष्कासित कर दिया जाए। आरके सिंह को एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का समय दिया गया था।
एनडीए उम्मीदवारों पर हमला और विवाद
आरके सिंह द्वारा सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो इस कार्रवाई की बड़ी वजह बना। उन्होंने अपने ही गठबंधन एनडीए के कुछ प्रत्याशियों को वोट न देने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि किसी अपराधी या भ्रष्ट व्यक्ति को वोट नहीं देना चाहिए, चाहे वह किसी भी समुदाय से हो। उन्होंने तीखा बयान देते हुए कहा था कि ऐसे लोगों को वोट देने वाले “चुल्लू भर पानी में डूब जाएं।”
उनके इस बयान ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी और पार्टी ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना।
बिहार के विकास को लेकर तीखी टिप्पणी
वीडियो में उन्होंने कहा कि यदि अपराधियों को चुनने की प्रवृत्ति जारी रही तो बिहार में अपराध और भ्रष्टाचार बढ़ेगा और विकास का सपना कभी पूरा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे उम्मीदवारों को चुनने से बिहार “कभी विकास नहीं कर पाएगा।”
सम्राट चौधरी पर भी गंभीर आरोप
आरके सिंह ने बिहार के उपमुख्यमंत्री और एनडीए प्रत्याशी सम्राट चौधरी पर भी हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि उन पर हत्या और उम्र प्रमाणपत्र में फर्जीवाड़े जैसे आरोप हैं, जिनका जवाब आज तक नहीं दिया गया। साथ ही उन्होंने जनसुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर द्वारा लगाए गए आरोपों का हवाला देते हुए अपने ही दल के नेताओं से जवाब देने या इस्तीफा देने की मांग की।

