
उल्हासनगर में भाजपा को उस समय बड़ी राजनीतिक चोट लगी जब पार्टी के छह पूर्व नगरसेवकों ने भाजपा छोड़कर शिंदे गुट की शिवसेना और टीम ओमी कालानी (टीओके) का दामन थाम लिया। यह घटना स्थानीय निकाय चुनाव से ठीक पहले सामने आई है, जिससे भाजपा की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं।
भाजपा के तीन बड़े स्थानीय चेहरे भी हुए बाहर
शहर में भाजपा के जिन तीन नेताओं को सबसे मजबूत माना जाता था, उन्होंने भी पार्टी छोड़ दी। इससे स्थानीय संगठन की ताकत पर सीधा असर पड़ा है, क्योंकि ये चेहरे उल्हासनगर राजनीति में हमेशा प्रभावशाली रहे हैं।
बिहार में जीत, महाराष्ट्र में टूट—भाजपा के लिए विरोधाभासी स्थिति
एक ओर बिहार में भाजपा समर्थित एनडीए गठबंधन ने शानदार बहुमत हासिल किया है, वहीं महाराष्ट्र में लगातार हो रही नेता-निकासी भाजपा के लिए चिंताजनक माहौल पैदा कर रही है। छह नेताओं का एक साथ पार्टी छोड़ना बड़ा झटका माना जा रहा है।
उल्हासनगर-कल्याण क्षेत्र में चुनाव से पहले भाजपा को नुकसान
उल्हासनगर और कल्याण लोकसभा क्षेत्र में होने वाले आगामी नगर निगम चुनावों से पहले यह टूट भाजपा के लिए नुकसानदेह हो सकती है। यह क्षेत्र पहले से ही राजनीतिक रूप से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है।
टीओके की पकड़ फिर से मजबूत होने के संकेत
दो महीने पहले पांच पूर्व नगरसेवकों के भाजपा में शामिल होने से कालानी परिवार की पकड़ कमजोर हुई थी, लेकिन अब छह नेताओं के शिंदे गुट और टीओके में जाने से यह पकड़ फिर मजबूत होती दिखाई दे रही है।
किस-किस नेता ने छोड़ा भाजपा?
शिंदे गुट की शिवसेना में किशोर वनवारी और मीना सोनडे शामिल हुए हैं। वहीं जम्नु पुरसवानी, प्रकाश माखीजा, महेश सुखरामानी और चार्ली परवानी ने टीओके का हाथ थामा है।
इन सभी नेताओं का स्वागत सांसद श्रीकांत शिंदे और टीओके प्रमुख ओमी कालानी ने किया।
पूर्व पदों और प्रभाव के चलते बढ़ा राजनीतिक वजन
जम्नु पुरसवानी पांच बार के नगरसेवक और पूर्व उपमहापौर रहे हैं। प्रकाश माखीजा चार बार स्थायी समिति अध्यक्ष रहे, जबकि महेश सुखरामानी महाराष्ट्र साहित्य अकादमी में राज्य मंत्री के पद पर रह चुके हैं।
इन अनुभवी नेताओं के छोड़ने से भाजपा की स्थिति और कमजोर होती दिख रही है।
प्रकाश माखीजा ने बताई नाराजगी की वजह
प्रकाश माखीजा के अनुसार भाजपा और शिवसेना के वरिष्ठ नेता एक-दूसरे के खिलाफ काम कर रहे हैं, जिसकी वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया।
सूत्रों का कहना है कि यदि शीर्ष नेतृत्व समय रहते हस्तक्षेप नहीं करता, तो यह खींचतान अन्य क्षेत्रों में भी फैल सकती है।
निकाय चुनाव से पहले भाजपा-शिंदे गुट में तकरार क्यों?
राज्य में होने वाले निकाय चुनावों से पहले भाजपा और शिंदे गुट के बीच बढ़ती खींचतान चर्चा का विषय बनी हुई है। उल्हासनगर और कल्याण क्षेत्र में महायुति सहयोगियों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
तनाव की वजह: कल्याण लोकसभा क्षेत्र में राजनीतिक खींचातानी
तनाव उस समय बढ़ गया जब रविंद्र चव्हाण राज्य भाजपा अध्यक्ष बने और उन्होंने कल्याण लोकसभा क्षेत्र में संगठन मजबूत करना शुरू किया, जो शिंदे परिवार का गढ़ माना जाता है।
इसके चलते कई शिवसेना नेता भाजपा में गए, जिसने राजनीतिक संतुलन बिगाड़ दिया।
सांसद श्रीकांत शिंदे का जवाबी कदम
इसके बाद सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी भाजपा के नेताओं को अपने खेमे में शामिल करना शुरू किया।
अब छह नेताओं का भाजपा छोड़कर शिवसेना व टीओके में जाना इसी राजनीतिक खींचातानी का नतीजा बताया जा रहा है।
आगामी चुनावों पर असर साफ—भाजपा के लिए चुनौती बढ़ी
स्थानीय निकाय चुनाव करीब हैं, और ऐसे में नेताओं का लगातार बाहर जाना भाजपा के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकता है।
राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और गठबंधन की अंदरूनी तकरार ने चुनावी तस्वीर को और पेचीदा बना दिया है।

