
मुंबई (दहिसर): रावलपाड़ा स्थित शुक्ला कंपाउंड पर बीएमसी की संभावित कार्रवाई को लेकर स्थानीय निवासियों में भय और बेचैनी का माहौल है। वर्षों से बसे सैकड़ों परिवारों पर अब उजड़ने का खतरा मंडरा रहा है।
जिन घरों में लोगों ने अपना पूरा जीवन खपा दिया, वही अब बीएमसी की तोड़क कार्रवाई की जद में बताए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने यहां अपनी गाढ़ी कमाई से घर बनाए हैं, बिजली-पानी के नियमित कनेक्शन हैं, फिर भी उन्हें नोटिस देकर हटाने की बात की जा रही है।
😟 “छत छिन जाएगी तो कहाँ जाएंगे?” — निवासियों की व्यथा
स्थानीय निवासियों के चेहरों पर चिंता साफ झलक रही है। एक बुजुर्ग महिला ने कहा —
“अगर ये घर टूट गए, तो हमारे सिर पर छत नहीं बचेगी।”
करीब 20 साल से शुक्ला कंपाउंड में रह रहे परिवारों की यही पुकार है कि उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था दिए बिना बेघर न किया जाए।
🗣️ गोपाल शेट्टी ने बीएमसी पर साधा निशाना
भाजपा के वरिष्ठ नेता और उत्तर मुंबई के पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने इस मुद्दे पर स्थानीय मनपा सहायक आयुक्त से मुलाकात की। बैठक में उन्होंने निवासियों की पीड़ा सामने रखते हुए कहा —
“अगर बीएमसी न्यायालय के आदेश पर कुत्तों के लिए आश्रय बना सकती है, तो मैं इंसानों के लिए घर की बात कर रहा हूँ — इसमें गलत क्या है? क्या इंसान अब बीएमसी की नजर में कुत्तों से भी गए-गुजरे हो गए हैं?”
उनके इस बयान ने स्थानीय जनता के बीच नई उम्मीद और चर्चा दोनों को जन्म दिया है।
🏛️ बीएमसी की दलील और निवासियों का विरोध
बीएमसी का कहना है कि शुक्ला कंपाउंड का इलाका नियमन के बाहर और अवैध निर्माणों से भरा है। लेकिन निवासियों का दावा है कि उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया गया है, नियमित टैक्स भरा जाता है, और सरकारी योजनाओं में नाम दर्ज हैं।
फिर भी कार्रवाई की तलवार लटकने से लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
🙏 “हम कोई सुविधा नहीं मांग रहे, बस छत मत छीनिए”
एक स्थानीय महिला ने कहा —
“हम कोई सुविधा नहीं मांग रहे, बस हमारे सिर से छत मत छीने।”
उनका यह बयान शहर के नियोजन और मानवीय संवेदनाओं दोनों पर सवाल उठाता है।
🏛️ भाजपा विधायक मनीषा चौधरी ने उठाया मुद्दा
भाजपा की विधायक मनीषा चौधरी ने भी कहा है कि वह शुक्ला कंपाउंड का मुद्दा आगामी महाराष्ट्र विधानसभा अधिवेशन में उठाएँगी। उन्होंने बीएमसी से आग्रह किया कि कार्रवाई से पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
🤝 नागरिक संगठनों की अपील
नागरिक संगठनों ने भी निवासियों के समर्थन में आवाज उठाई है। उनका कहना है कि अगर कोई कार्रवाई होती है, तो पहले मानवीय आधार पर पुनर्वास योजना बनाई जानी चाहिए।

