Supreme Court: क्रीमी लेयर पर जस्टिस बी.आर. गवई का बयान, बोले—आलोचना के बावजूद समर्थन कायम

Thecity news
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SC समुदाय में क्रीमी लेयर लागू होनी चाहिए: जस्टिस बी.आर. गवई, बोले—सकारात्मक कार्रवाई का लाभ सही जरूरतमंदों तक पहुंचे

Supreme Court के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई ने कहा कि अनुसूचित जाति (SC) समुदाय में क्रीमी लेयर के सिद्धांत के समर्थन के कारण उन्हें अपने ही समाज के लोगों की आलोचना झेलनी पड़ी, लेकिन इसके बावजूद वे अपने रुख पर कायम हैं।


क्रीमी लेयर का उद्देश्य गलत नहीं, सामाजिक न्याय को मजबूत करना है: गवई

जस्टिस गवई ने कहा कि उनके बयान को कई लोगों ने गलत रूप में लिया, जबकि उनका उद्देश्य सामाजिक न्याय की दिशा में संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना था।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि SC में क्रीमी लेयर लागू करने का विचार डॉ. भीमराव आंबेडकर की सोच से प्रेरित है।
आंबेडकर सकारात्मक कार्रवाई (Affirmative Action) को उन लोगों को “साइकिल” देने जैसा मानते थे, जो सामाजिक रूप से पिछड़े थे, ताकि वे आगे बढ़ सकें और बराबरी की स्थिति तक पहुंच सकें।


“जो आगे बढ़ चुके हैं, उन्हें सुरक्षा कवच छोड़ने का समय है”

जस्टिस गवई ने उदाहरण देते हुए कहा:

  • यदि कोई व्यक्ति 0 किलोमीटर से शुरुआत करता है
  • और कोई पहले से 10 किलोमीटर आगे है
  • तो पीछे वाले व्यक्ति को साइकिल देना जरूरी है ताकि वह बराबरी पर आ सके

जब दोनों बराबरी पर आ जाएं, तो सबको साथ चलने का अवसर मिलना चाहिए। लेकिन जो लोग अब काफी आगे पहुंच चुके हैं, उन्हें सकारात्मक कार्रवाई के सुरक्षा चक्र से बाहर निकलना चाहिए ताकि अन्य जरूरतमंद लोगों को आगे आने का मौका मिल सके।


आंबेडकर का लक्ष्य—वास्तविक सामाजिक और आर्थिक न्याय

जस्टिस गवई के अनुसार, डॉ. आंबेडकर का उद्देश्य हमेशा यह रहा कि समाज में वास्तविक सामाजिक-आर्थिक बराबरी स्थापित हो। इसलिए Affirmative Action का लाभ उन लोगों तक पहुँचना चाहिए, जो वास्तव में इसके हकदार हैं, न कि उन तक जो पहले ही काफी प्रगति कर चुके हैं।


नीतियों का लक्ष्य संतुलित सामाजिक प्रगति होना चाहिए

जस्टिस गवई ने कहा कि लोकतंत्र में यह आवश्यक है कि:

  • सकारात्मक कार्रवाई का लाभ सही लाभार्थियों को मिले
  • नीतियों से समाज में संतुलित विकास हो
  • अवसर उन तक पहुँचे, जो अभी भी सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े हैं
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