नासिक के त्र्यंबकेश्वर में एक आदिवासी महिला द्वारा आर्थिक तंगी में नवजात शिशु बेचने का मामला सामने आया। महिला पहले भी 6 बच्चों को बेच चुकी है। CWC और पुलिस ने जांच शुरू की।
नासिक के त्र्यंबकेश्वर तालुका में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक आदिवासी महिला ने आर्थिक तंगी के चलते अपने दो महीने के नवजात बच्चे को बेच दिया। जांच में खुलासा हुआ कि यह महिला इससे पहले भी 6 बच्चों को बेच चुकी है।
नवजात को बेचने का खुलासा ऐसे हुआ
त्र्यंबकेश्वर तहसील के टाकेदेवगांव ग्राम पंचायत के बर्थ्यांची वाड़ी में रहने वाली इस महिला का 14वां प्रसव 4 अक्टूबर 2025 को सरकारी अस्पताल में हुआ था। गर्भावस्था के दौरान वह सोनोग्राफी, रक्त जांच या किसी भी मेडिकल जांच के लिए तैयार नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग के हस्तक्षेप पर प्रसव कराया गया।
दो महीने बाद जब स्वास्थ्य कर्मचारी नियमित वजन जांच के लिए घर पहुँचे, तो नवजात गायब मिला। पूछताछ में महिला ने बताया कि आर्थिक मजबूरी के कारण उसे नवजात शिशु बेचना पड़ा।
पहले भी बेच चुकी 6 बच्चे
स्थानीय सूत्रों के अनुसार महिला ने इससे पहले 6 और बच्चों को बेचा है।
14 बच्चों में से:
- 12 जीवित
- 1 की मृत्यु
- 3 बच्चों को अलग-अलग परिवारों को दिया गया
पुलिस ने तीनों परिवारों और बच्चों को घोटी पुलिस स्टेशन लाया और पूछताछ शुरू की।
11 बच्चे पुलिस हिरासत में
पुलिस ने बताया कि घर से पाए गए 4 बच्चों के साथ, कुल 11 बच्चों को हिरासत में लेकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
माता-पिता को भी पुलिस स्टेशन बुलाकर पूछताछ जारी है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रशासन को जिम्मेदार बताया
सामाजिक कार्यकर्ता भगवान मधे ने कहा:
“आज भी एक माँ को पैसे के लिए अपने बच्चे बेचने पड़ रहे हैं, यह प्रशासन की नाकामी है। इसे घरकुल योजना का लाभ तक नहीं मिला।”
उन्होंने बाल विकास विभाग से उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
CWC ने संभाली जांच, पूरी प्रक्रिया शुरू
पुलिस अधीक्षक बाळासाहेब पाटिल ने बताया कि:
- मामले की जांच चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को सौंपी गई है।
- सभी बच्चों और माता-पिता की व्यक्तिगत काउंसलिंग व सत्यापन किया जा रहा है।
- बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

