
नई दिल्ली: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी है कि संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर 2025 तक चलेगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष कई मुद्दों पर हंगामे के मूड में दिख रहा है।
📅 19 दिनों में होंगी 15 बैठकें
सत्र के दौरान कुल 15 बैठकें होंगी। यह सत्र संभवतः 2014 के बाद NDA सरकार का चौथा सबसे छोटा सत्र होगा।
2017 और 2022 के शीतकालीन सत्र 13 दिन के थे, जबकि 2023 का सत्र केवल 14 दिन चला था।
कांग्रेस ने सत्र की कम अवधि को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।
📜 लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का प्रस्ताव
सरकार इस सत्र में 129वां संविधान संशोधन विधेयक पेश कर सकती है।
यह विधेयक देशभर में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के लिए संविधान में संशोधन का प्रस्ताव रखेगा।
यह “वन नेशन, वन इलेक्शन” नीति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
⚖️ दोषी मंत्री या मुख्यमंत्री को हटाने का प्रावधान
इसके साथ ही 130वां संविधान संशोधन विधेयक भी पेश होने की संभावना है।
इस विधेयक में यह प्रावधान होगा कि यदि कोई मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री 30 दिन या उससे अधिक की जेल की सजा पाता है, तो उसे स्वतः पद से हटाया जा सकेगा।
📑 अन्य प्रमुख विधेयक जो पेश हो सकते हैं
सरकार इस सत्र में कई अन्य अहम विधेयक भी पेश कर सकती है—
- जन विश्वास विधेयक, 2025
- दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता संशोधन विधेयक
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025
- औषधि, चिकित्सा उपकरण और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 2025
इसके अलावा, लोकसभा उपाध्यक्ष का चुनाव भी इस सत्र में कराए जाने की संभावना है — जो 17वीं लोकसभा में पूरे कार्यकाल तक लंबित रहा।
🧾 विपक्ष ला सकता है मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग
विपक्षी दलों की ओर से संकेत मिले हैं कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव ला सकते हैं।
अगस्त में हुई INDIA गठबंधन की बैठक में TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि “हम अगले सत्र में CEC के खिलाफ नोटिस देंगे।”
🗳️ बिहार SIR और ‘वोट चोरी’ पर गरमाएगी राजनीति
सत्र के दौरान बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी जोरदार बहस की उम्मीद है।
राहुल गांधी बार-बार ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को उठा रहे हैं, जो संसद में भी गूंज सकता है।
साथ ही, बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर भी चर्चा की संभावना है।
🧠 निष्कर्ष: छोटा लेकिन रणनीतिक सत्र
हालांकि सत्र की अवधि छोटी है, लेकिन राजनीतिक और विधायी दृष्टि से यह बेहद अहम सत्र साबित हो सकता है।
एक ओर सरकार संविधान संशोधन विधेयकों के जरिए बड़ा सुधार लाना चाहती है, वहीं विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाने की तैयारी में है।

