महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के ऑपरेशन सिंदूर पर बयान से विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने माफी मांगने से इनकार करते हुए कहा कि संविधान उन्हें सवाल पूछने का अधिकार देता है।
क्या है विवाद?
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आलोचनाओं के बीच चव्हाण ने साफ कर दिया है कि वह माफी नहीं मांगेंगे।
बुधवार को उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है ताकि परमाणु निजीकरण विधेयक (शांति विधेयक) जैसे अहम मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाया जा सके।
पुणे में क्या बोले पृथ्वीराज चव्हाण?
पुणे में मीडिया से बातचीत करते हुए चव्हाण ने कहा,
“माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता। मैं माफी क्यों मांगूं? संविधान ने मुझे सवाल पूछने का अधिकार दिया है। मैं इस विषय पर विस्तार से मीडिया से बात करूंगा। यह मेरा अधिकार है।”
उन्होंने दोहराया कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर क्या दिया था बयान?
मंगलवार को पुणे में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा था,
“ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन ही हमें पूरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था। 7 तारीख को हुए आधे घंटे के हवाई संघर्ष में हम पराजित हो गए। भारतीय विमानों को मार गिराया गया। वायु सेना पूरी तरह से ठप हो गई थी और एक भी विमान नहीं उड़ा।”
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
क्या है ‘ऑपरेशन सिंदूर’?
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने पर्यटकों पर हमला किया था, जिसमें 26 पुरुष पर्यटकों की धर्म पूछकर हत्या कर दी गई थी।
इस हमले के जवाब में भारतीय सेना ने 7 मई को पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। इस सैन्य कार्रवाई में 9 आतंकी ठिकाने ध्वस्त किए गए थे।
इसके बाद दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले हुए। अंततः 10 मई को पाकिस्तान की ओर से युद्धविराम की पेशकश की गई।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
चव्हाण के बयान को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। जहां एक ओर उनके बयान की आलोचना हो रही है, वहीं चव्हाण इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकार से जोड़कर देख रहे हैं।
निष्कर्ष
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर दिए गए बयान ने पृथ्वीराज चव्हाण को एक नए राजनीतिक विवाद के केंद्र में ला खड़ा किया है। माफी से इनकार और संविधान का हवाला देकर सवाल पूछने की बात कहना इस मुद्दे को और गर्मा सकता है। आने वाले दिनों में इस बयान पर सियासी घमासान और तेज होने की संभावना है।

