दोनों कोर्स मैनेजमेंट करियर के रास्ते खोलते हैं, लेकिन डिग्री, सिलेबस, फीस और इंडस्ट्री एक्सपोजर के मामले में इनके बीच अहम अंतर है।
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर। मैनेजमेंट के क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे छात्रों के सामने अक्सर MBA और PGDM में से सही विकल्प चुनने की दुविधा रहती है। दोनों ही पोस्टग्रेजुएट लेवल के मैनेजमेंट प्रोग्राम हैं और इनके बाद कॉरपोरेट सेक्टर में करियर के कई अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, MBA एक डिग्री कोर्स है, जबकि PGDM डिप्लोमा प्रोग्राम है। एडमिशन से पहले छात्रों के लिए यह समझना जरूरी है कि उनके करियर लक्ष्य के हिसाब से कौन सा विकल्प बेहतर हो सकता है।
MBA डिग्री क्या है?
MBA की डिग्री आमतौर पर विश्वविद्यालय या उससे संबद्ध कॉलेज की ओर से दी जाती है। इसमें मैनेजमेंट के सिद्धांतों और एकेडमिक पहलुओं पर अपेक्षाकृत ज्यादा जोर दिया जाता है। MBA का सिलेबस अक्सर संबंधित विश्वविद्यालय या संस्थागत ढांचे के अनुसार तय होता है।
PGDM में क्या खास है?
PGDM यानी पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट मुख्य रूप से ऑटोनॉमस मैनेजमेंट संस्थानों की ओर से संचालित किया जाता है। देश के कई प्रतिष्ठित बी-स्कूल PGDM या इसी तरह के मैनेजमेंट प्रोग्राम चलाते हैं। डिग्री के बजाय डिप्लोमा होने के बावजूद प्रतिष्ठित संस्थान से किया गया PGDM कॉरपोरेट करियर के लिए उपयोगी हो सकता है।
PGDM में इंडस्ट्री की जरूरतों और प्रैक्टिकल नॉलेज पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। संस्थान अपने स्तर पर सिलेबस में बदलाव कर सकते हैं, जिससे बदलती इंडस्ट्री जरूरतों और नए बिजनेस ट्रेंड्स को अपेक्षाकृत जल्दी शामिल किया जा सकता है।
सिलेबस और पढ़ाई में कितना अंतर?
MBA में मैनेजमेंट के सैद्धांतिक और एकेडमिक पक्ष को अधिक महत्व मिल सकता है, जबकि PGDM में प्रैक्टिकल मैनेजमेंट स्किल, केस स्टडी और इंडस्ट्री ओरिएंटेशन पर ज्यादा जोर दिया जा सकता है। हालांकि, यह अंतर हर संस्थान में एक जैसा नहीं होता। किसी भी कोर्स में एडमिशन से पहले संबंधित संस्थान का सिलेबस जरूर देखना चाहिए।
एडमिशन और फीस का क्या हिसाब है?
MBA और PGDM दोनों में CAT, MAT, XAT, सीएमएटी, एटीएमए और कुछ संस्थानों में राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षाओं के जरिए एडमिशन मिल सकता है। हालांकि, पात्रता और चयन प्रक्रिया संस्थान के अनुसार अलग हो सकती है।
फीस की बात करें तो कई सरकारी या विश्वविद्यालय से जुड़े MBA प्रोग्राम अपेक्षाकृत कम खर्च में उपलब्ध होते हैं, जबकि प्रतिष्ठित PGDM संस्थानों की फीस काफी अधिक हो सकती है। हालांकि, यह तय नियम नहीं है कि MBA हमेशा सस्ता और PGDM हमेशा महंगा होगा। फीस की तुलना संस्थान, कोर्स की अवधि और मिलने वाली सुविधाओं के आधार पर करनी चाहिए।
MBA या PGDM, किसे चुनना बेहतर?
अगर छात्र डिग्री और एकेडमिक पढ़ाई को प्राथमिकता देता है तो MBA उसके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं कॉरपोरेट सेक्टर, इंडस्ट्री एक्सपोजर और प्रैक्टिकल मैनेजमेंट स्किल पर ज्यादा ध्यान देने वाले छात्र PGDM पर विचार कर सकते हैं।
हालांकि, करियर के लिहाज से सिर्फ MBA या PGDM नाम देखकर फैसला करना सही नहीं होगा। संस्थान की प्रतिष्ठा, मान्यता, प्लेसमेंट रिकॉर्ड, फीस, सिलेबस, इंडस्ट्री एक्सपोजर और छात्र के अपने करियर लक्ष्य को ध्यान में रखकर निर्णय लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

