मतदाता सूची में राजनीतिक दलों की उदासीनता, बीएलए नियुक्ति के आंकड़े खोलते हैं पोल

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मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार आरोप लगाने वाले राजनीतिक दलों की गंभीरता का अंदाजा बूथ लेबल एजेंट (बीएलए) नियुक्ति के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। सत्ताधारी भाजपा को छोड़कर अन्य राजनीतिक दल इस प्रक्रिया में उदासीन दिखाई दे रहे हैं।

चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाने वाले राजनीतिक दलों ने अपनी जिम्मेदारी निभाने में ढील बरती है।


📝 बीएलए का काम और जिम्मेदारी

विभिन्न चुनावों के लिए तैयार की जाने वाली मतदाता सूची में चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ-साथ राजनीतिक दलों की भी अहम भूमिका होती है।

  • मतदाता सूची में नए मतदाताओं का पंजीकरण
  • मृत या दोहराए गए मतदाताओं को सूची से हटाना
  • छूटे हुए मतदाताओं के नाम जोड़ना

इन कार्यों के लिए चुनाव आयोग बूथ लेबल ऑफिसर (बीएलओ) नियुक्त करता है। राजनीतिक दलों की तरफ से बूथ लेबल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करने के लिए चुनाव आयोग को अपने कार्यकर्ताओं के नाम भेजे जाते हैं।

चुनाव कार्यालय के कर्मचारी बीएलए से संपर्क कर मतदाता सूची का अध्ययन करते हैं। बीएलए स्थानीय स्तर पर रहने के कारण मतदाताओं की जानकारी रखने में अधिक सक्षम होता है।


📊 बीएलए नियुक्ति में भाजपा सबसे आगे, मनसे पीछे

महाराष्ट्र में 1 लाख से अधिक मतदान केंद्र हैं। हर बूथ के लिए राजनीतिक दल एक बीएलए नियुक्त करते हैं।

बीएलए नियुक्ति आंकड़े:

  • भाजपा: 43,179
  • कांग्रेस: 27,200
  • शिवसेना (उद्धव): 11,930
  • शिवसेना (शिंदे): 10,386
  • राकांपा (अजित): 5,624
  • राकांपा (शरद): 5,256
  • मनसे: 3,743
  • बहुजन समाज पार्टी: 1,492

मुंबई शहर और उपनगरों के साथ ठाणे, लातूर, वर्धा, वाशिम, नंदुरबार और पुणे को छोड़कर मनसे ने कहीं भी अपने एजेंट नियुक्त नहीं किए

जिला-wise लापरवाही:

  • कांग्रेस ने 7 जिलों में एजेंट नहीं नियुक्त किए
  • शिवसेना (उद्धव): 11
  • शिवसेना (शिंदे): 13
  • राकांपा (अजित): 0
  • राकांपा (शरद): 14
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